Swad Ka Safarnama: सहजन की फली पोषक तत्वों से भरपूर है. इसका सेवन शरीर की कई बीमारियों में फायदेमंद होता है. इस फली की उत्पत्ति की इतिहास भी काफी दिलचस्प है. आइए जानते हैं इससे जुड़ी रोचक बातें.
हाइलाइट्स
गुणों की वजह से सहजन की फली को सुपरफूड भी माना जाता है.
सहजन की फली हड्डियों को मजबूत बनाने में भी असरदार होती है.
स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama): भारत में सेम, ग्वार, लोबिया आदि फलियों (Beans) को भोजन के रूप में खूब प्रयोग में लाया जाता है. ऐसी ही एक फली सहजन भी है. कहा जाता है कि सहजन सबसे पौष्टिक सब्जी है, जिसमें गुण ही गुण हैं. सब्जियों के रूप में इसके कई प्रयोग हैं. इसे जीवाणुरोधी माना जाता है और यह लिवर के लिए भी बहुत लाभकारी है. इसकी उत्पत्ति का इतिहास काफी प्राचीन है और यह भारत समेत एशियाई देशों की सब्जी मानी जाती है.
सुपर फूड का दर्जा भी है हासिल
सहजन (Moringa Drumstick) आम फलियों जैसी लचर या मुलायम नहीं होती. यह अंगुली के बराबर मोटी होती है और इसमें रेशे बहुत अधिक पाए जाते हैं. इसका स्वाद भी शानदार होता है. इसे सुपरफूड माना जाता है और कुछ फूड एक्सपर्ट का कहना है कि अनाज, कंद और करीब 120 सब्जियों की तुलना की गई तो सहजन को सबसे अधिक पौष्टिक पाया गया. इससे आगे बढ़कर यह भी कहा गया कि सहजन में पालक से अधिक आयरन, संतरे से अधिक विटामिन सी, दूध से अधिक कैल्शियम, बादाम से अधिक विटामिन ई और केले से ज्यादा पोटेशियम होता है. इतिहास की पुस्तकें बताती हैं कि मौर्य काल में भारत में युद्ध के मोर्चों पर सैनिकों को सहजन का अर्क दिया जाता था ताकि लड़ाई के दौरान उन्हें आवश्यक शक्ति और ऊर्जा मिलती रहे, साथ ही सैनिकों को लड़ाई के तनाव और चोटों से होने वाले दर्द से राहत मिले. मिस्र की सभ्यता में इसके तेल को बहुपयोगी माना गया था.
आक्रामक प्रजाति है, इसलिए गुण भी हैं अलग
सहजन के पेड़ को आक्रामक माना जाता है. पुराने समय के कवि रहिमन ने कहा है कि ‘सहजन अति फूले तऊ, डार पात की हानि.. अर्थ यह है कि यह जहां पैदा होता है, वहां यह किसी और पेड़-पौधे को उगने नहीं देता है. कई देशों में इसे आक्रामक प्रजाति का दर्जा दिया गया है. माना जाता है कि इसी आक्रामकता ने इस फली में विशेष गुण भर दिए हैं. यह फली हजारों वर्षों से भारत और आसपास के देशों में सब्जी के रूप में उपयोग की जा रही है. इसका सूप भी बनाया जा सकता है, करी में काटकर खाया जा सकता है. इसे फ्राई कर खाने से इसकी गंध और स्वाद अलग ही मजा देते हैं.
साउथ इंडिया में तो यह फली अलग ही स्वाद भर देती है. इसका गाढ़ा स्टू भी खूब खाया जाता है, जिसमें अन्य सब्जियां, दाल व तीखे मसाले मिलाए जाते हैं. कुछ देशों में नॉनवेज के साथ भी इसे परोसा जाता है. कुछ देशों में इसकी पत्तियों, जड़ों आदि को सुखाकर चाय और जूस के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसका ऑयल भी बनता है जो परफ्यूम और कॉस्मेटिक के काम आता है.
हजारों वर्षों से भारत में उपयोग
सहजन एक ऐसी फली है, जिसकी शुरुआती दौर में खेती नहीं की गई. जब इसके गुणों की जानकारी मनुष्य तक पहुंचती रही तो इसकी खेती का विस्तार बढ़ता गया. इसके बावजूद यह कहा जाता है कि 2000 हजार ईसा पूर्व यह भारत में पैदा हो चुकी थी. उसके बाद यह पूरे एशिया में भी फैली. फूड हिस्टोरियन इस फली को अफ्रीका के मूल से भी जोड़ते हैं. विश्वकोश ब्रिटेनिका (Britannica) के अनुसार सहजन उष्णकटिबंधीय एशिया के मूल निवासी हैं, लेकिन अफ्रीका और उष्णकटिबंधीय अमेरिका में भी प्राकृतिक रूप से पाई गई है. इसकी फूल, फली, पत्तियां और यहां तक कि टहनियां भी पकाकर खायी जाती हैं.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के कृषि विज्ञानी प्रो़ रंजीत सिंह व प्रो़ एसके सक्सेना द्वारा लिखित पुस्तक ‘Fruits’ में कहा गया है कि सहजन की उत्पत्ति उत्तर भारत में हुई और जलशोधन के लिए भी इसका उपयोग होता रहा है. इसे शुरू से ही आक्रमक माना जाता रहा है. अब सहजन की फली भोजन में रूप में काफी विस्तार पा चुकी है. यह दक्षिण पूर्व एशिया खासकर भारत, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, कंबोडिया और बर्मा में भोजन के रूप में खूब प्रचलन में है. इसके अलावा अफ्रीका, मध्य और दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन में फली और बीजों का कम पैमाने पर उपयोग होता है.
शरीर की सूजन को रोकने के भी हैं गुण
पौष्टिक तत्वों की बात करें तो 100 ग्राम कटी हुई सहजन की फली में 26 कैलोरी, 0.1 ग्राम कुल फैट, 259 मिलीग्राम पोटेशियम, 3.7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 2.5 ग्राम प्रोटीन, 24 मिलीग्राम मैग्नीशियम व अन्य विटामिन्स व खनिज पाए जाते हैं. फूड एक्सपर्ट व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार आम लोगों के भोजन में सहजन का उपयोग बढ़ने लगा है. वह इसलिए कि यह शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है. रिसर्च बताता है कि इस फली में ऐसे रस होते हैं जो एंटी-फंगल की विशेषताएं लिए हुए हैं जो रोग पैदा करने वाले रोगाणुओं से शरीर की रक्षा करते हैं.
इस फली में पैदा होने वाला ऑयल लीवर के एंजाइम के स्तर को बनाए रखता है, जिसके चलते लीवर फैट को पचा लेता है और विषाक्तता को बाहर निकाल देता है. इसका सेवन शरीर में पैदा होने वाली सूजन को रोक देता है. खास बात यह भी है कि इसमें पाए जाने वाला एसिड ब्लड शुगर को भी कंट्रोल में रखता है.
शरीर की कोशिकाएं स्वस्थ बनी रहती हैं
रिसर्च यह भी बताती है कि फाइबरयुक्त सहजन की फली में कैल्शियम और फास्फोरस जैसे आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं जो शरीर की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने में मदद करते हैं. इसके अर्क में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए गए हैं जो गठिया रोगों को का नेचुरल तरीके से इलाज करते हैं. यही अर्क शरीर की कोशिकाओं को टूट-फूट से बचाता है. इसका नियमित सेवन मेंटली हेल्थ पर पॉजिटिव असर छोड़ता है और पार्किंसंस जैसे रोग से बचाता है. सामान्य तौर पर इसका सेवन किसी प्रकार के साइड इफेक्ट पैदा नहीं करता है. लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से मितली की समस्या पैदा हो सकती है. बहुत अधिक सेवन करने से लूजमोशन की समस्या भी पैदा हो सकती है.