हल्दीराम वो ब्रांड जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है. एक ऐसा ब्रांड जो देश के मिडिल क्लास को प्रीमियम होने का अहसास कराता है तो वहीं 5 और 10 रुपये के पैकेट से देश के आम लोगों तक पहुंच जाता है.
हल्दीराम वो ब्रांड जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है. एक ऐसा ब्रांड जो देश के मिडिल क्लास को प्रीमियम होने का अहसास कराता है तो वहीं 5 और 10 रुपये के पैकेट से देश के आम लोगों तक पहुंच जाता है. जिस कंपनी ने गुलाम भारत से लेकर आजादी की पहली किरण तक देखी, अब उस कंपनी के बिकने की खबरें आने लगी है. देश की पॉपुलर नमकीन और स्नैक्स बनाने वाली कंपनी हल्दीरा जल्द बिक सकती है. इसे खरीदने वालों का तांता लग रहा है. देशी स्वाद वाली इस कंपनी का मालिक विदेशी हो सकता है. ब्लैकस्टोन (Blackstone) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने कंपनी की 75 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगाई है. इसके लिए ब्लैकस्टोन के अलावा अबु धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी , सिंगापुर स्टेट फंड जीआईसी ने भी बोली लगाई है.
कहां रह गई कमी
हल्दीराम की शुरुआत 1937 में गंगा बिशन अग्रवाल ने बीकानेर में एक छोटी से दुकान की थी. सोन पपड़ी से लेकर सूखे समोसे, मठरी, नमकीन भुजिया, मिक्सचर, रेडी टू ईट, बिस्किट, कुकीज जैसे स्नैक्स और स्वीट्स बनाने वाली कंपनी परिवार की नई जेनरेशन आगे बढ़ाने में बहुत दिलचस्पी नहीं दे रही है. परिवार इस कारोबार को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा. अग्रवाल फैमिली की नई पीढ़ी ने खुद को कंपनी के डे टू डे ऑपरेशन से भी अलग कर लिया. कंपनी के सीईओ पद की जिम्मेदारी संभालने के बजाए केके. चुटानी को नियुक्त कर दिया.