हैदर अली आतिश का एक शेर है, बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो इक कतरा ए खूं न निकला। कुछ कुछ ऐसा ही हाल रहा हिंदी सिनेमा के दर्शकों को डराने की विकास बहल की नई कोशिश फिल्म ‘शैतान’ का। इन दिनों फिल्म या सीरीज के निर्देशन या क्रिएशन में विकास बहल का नाम जुड़ा हो तो दर्शक वैसे ही डरा हुआ रहता है। फिर भी ‘शैतान’ का विषय भय के प्रति आकर्षण के मनोविज्ञान को पकड़ने वाला विषय नजर आता है। माधवन का पहली बार हिंदी सिनेमा में (तेलुगु में वह विलेन बन चुके हैं) खलनायक बनकर परदे पर आना भी एक अलग तरह का आकर्षण है। काला जादू और वशीकरण देश की लोक कथाओं में सनातन धर्म के समय से मौजूद हैं। गांवों में बच्चा ज्यादा रोए, पेट बहुत गुड़गुड़ाए या तेज बुखार आने पर माएं आज भी रायलोन से नजर उतारती है और साथ में एक मंत्र बुदबुदाती है जिसमें देश की सबसे बड़ी जादूगरनी लोना के नाम का जिक्र आता है। साथ में एक जातिसूचक शब्द भी होता है, जिससे पता ये भी चलता है कि सामाजिक वर्ण व्यवस्था में उपयोग के अनुसार हर जाति का सामाजिक सम्मान होते रहने की परंपरा युगों से है।





