जालंधर सीट पर लगा दल-बदलुओं का मेला, हर किसी ने पाला बदला, अब दलित वोट का सहारा

NEWSDESK
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पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर 7वें और आखिरी चरण में 1 जून को वोट डाले जाएंगे. यहां की जालंधर सीट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. जालंधर में हार-जीत का खेल दलित मतदाओं के हाथ में है, क्योंकि यहां दलित वोटरों की तादाद 37 फीसदी है.

पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और तीन दल-बदलू नेताओं के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक होता दिखाई दे रहा है. जालंधर लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. यहां लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में 1 जून, शनिवार को वोट डाले जाएंगे. खास बात ये है कि जालंधर सीट पर हार-जीत का फैसला दलित मतदाता करते हैं. यहां दलित वोटरों की संख्या 37 फीसदी है.

जालंधर लोकसभा सीट पर 20 प्रत्याशी मैदान में हैं. इनमें बीजेपी की ओर से सुशील कुमार रिंकु, कांग्रेस के टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सीपीआई-एम से मास्टर पुरुषोत्तम लाल, आम आदमी पार्टी की ओर से पवन कुमार टीनू, बहुजन समाज पार्टी से बलविंदर कुमार, शिरोमणि अकाली दल से मोहिंदर सिंह कायपी को मैदान में उतारा है. ये सभी प्रत्याशी दलित समुदाय के रविदासिया समाज से आते हैं.

कांग्रेस का गढ़ रहा है जालंधर
कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली जालंधर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किसी जमाने में देश के 12वें प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल ने किया था. कांग्रेस ने अपने अभेद किले को बचाने के लिए दलित नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को मैदान में उतारा है. चन्नी रूपनगर जिले की चमकौर साहिब सीट से विधायक थे.

वर्तमान में यहां से आम आदमी पार्टी के सुशील कुमार रिंकू सांसद हैं. लेकिन अब वे बीजेपी में चले गए हैं. आप से पहले यह सीट लंबे समय से कांग्रेस के पास रही है. 2014 औप 2019 के चुनाव में कांग्रेस के संतोष कुमार चौधरी यहां से सांसद चुने गए थे. हालांकि, जनवरी 2023 में राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान चौधरी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, जिसके बाद हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के रिंकू ने जीत हासिल की थी. 2009 में कांग्रेस के टिकट पर ही मोहिंदर सिंह कायपी ने जीत हासिल की थी. 1998 के लोकसभा चुनाव में जालंधर सीट से जनता दल के टिकट पर इंद्र कुमार गुजराल विजयी हुए थे. गुजराल के बाद 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 का चुनाव कांग्रेस ने जीता था.

हर किसी ने बदला दल
आम आदमी पार्टी-आप ने दो बार के विधायक और अकाली दल के पूर्व नेता पवन कुमार टीनू को चुनाव मैदान में उतारा है. टीनू अप्रैल में ही आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे.

बीजेपी ने मौजूदा सांसद सुशील रिंकू पर दांव लगाया है. सुशील रिंकू को आम आदमी पार्टी ने पहले अपना उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन वे पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. रिंकू पिछले वर्ष कांग्रेस को छोड़कर ‘आप’ में शामिल हुए थे.

सुखबीर सिंह बादल नीत शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व प्रमुख व पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह कायपी को चुनाव मैदान में उतारा है. कायपी पिछले महीने कांग्रेस छोड़कर शिअद में शामिल हुए थे. वे यहां से कांग्रेस के टिकट पर सांसद रह चुके हैं.

प्रचार में ऐड़ी-चोटी का जोर
जालंधर निर्वाचन क्षेत्र में कुल 16.54 लाख मतदाता हैं, जिनमें से लगभग 37 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की है. इस लोकसभा सीट में नौ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें फिल्लौर, नकोदर, शाहकोट, करतारपुर, जालंधर पश्चिम, जालंधर मध्य, जालंधर उत्तर, जालंधर कैंट और आदमपुर शामिल हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार चरणजीत सिंह चन्नी क्षेत्र के मतदाताओं को अपने विधानसभा क्षेत्र चमकौर साहिब में किए गए विकास कार्यों के बारे में बता रहे हैं. वहीं भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा सांसद सुशील रिंकू को केंद्र की मोदी सरकार के 10 वर्षों के प्रदर्शन पर भरोसा है.

रिंकू ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘आप’ नेता दावा करते थे कि वे आम लोग हैं लेकिन अब वे ‘खास’ से भी अधिक हो गए हैं.

‘आप’ उम्मीदवार पवन कुमार टीनू को मान सरकार के दो वर्षों के प्रदर्शन पर भरोसा है. वह 43 हजार सरकारी नौकरियां, प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली, ‘आम आदमी’ क्लीनिक खोलने को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं

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