Lok Sabha election News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि धर्म के नाम पर देश को बांटने वाली कांग्रेस आजादी के बाद पहले दिन से ही समाज को बांटने वाली तुष्टिकरण की राजनीति करती चली आ रही है. तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति कांग्रेस के डीएनए में है.
कांग्रेस अपने घोषणा पत्र के जंजाल में लगातार फंसती ही जा रही है. पहले राहुल गांधी के संपत्ति के बंटवारे वाले वादे पर पीएम मोदी ने खुद ही हल्ला बोला तो कांग्रेस सफाई देती नजर आयी. कांग्रेस के तमाम स्टार प्रचारकों को उनके बचाव में सामने आना पड़ा. लेकिन जंग में बैकफुट पर ही आती दिखी. उधर, गांधी परिवार के सलाहकार सैम पित्रोदा ने अमेरिका में संपत्ति सरकार को जाने वाला बयान देकर कांग्रेस आलाकमान को और फजीहत में डाल दिया. अब तो बच निकलने का रास्ता नजर नही रहा है क्योंकि पीएम मोदी समेत तमाम आला मंत्रियों ने मानो ताबड़तोड़ हमले की ऐसी झड़ी लगायी है कि कांग्रेस अब एजेंडा सेट करना तो दूर, महज बचाव करती ही नजर आ रही है. उधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में प्रबुद्धों के सम्मेलन में आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में सरकारी नौकरियों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का संकेत दिया है, जो यदि लागू किया तो उसमें भारतीय सेना को भी इसके दायरे में ले सकता है. यह देश की एकता-अखंडता को प्रभावित करने वाला विचार है और यह स्थिति देश के लिए बहुत भयावह स्थिति होगी.
उधर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एक प्रबुद्ध वर्ग के सम्मेलन को संबोधित करने विशाखापट्टनम पहुंचे तो वो भी अपने आक्रामक तेवर से कांग्रेस की नीति और नीयत पर सवाल उठाते नजर आए. राजनाथ ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वो आरोप लगा रहे हैं कि प्रधानमंत्री झूठ बोल रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस खुलेआम इस देश की जनता की आँखों में धूल झोंक रही है. कांग्रेस ने जो अपना मैनिफेस्टो बनाया है, उसमें उसने जो जो वादे किए हैं, वे इस देश और समाज में नया डिवीजन पैदा करेंगे. कांग्रेस के घोषणा पत्र में माइनॉरिटी वाले चैप्टर में सेक्शन 3 और 6 को साथ में पढ़ने पर साफ हो जाता है कि कांग्रेस क्या करना चाह रही है. कांग्रेस के घोषणापत्र के सेक्शन 3 में लिखा है कि “हम अल्पसंख्यकों से संबंधित छात्रों और युवाओं को शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, सेवाओं, खेल, कला और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित और सहायता करेंगे. जबकि अनुभाग 6 में लिखा है, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अल्पसंख्यक शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सार्वजनिक रोजगार, सार्वजनिक कार्य अनुबंध, कौशल विकास, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में बिना किसी भेदभाव के अवसरों का उचित हिस्सा प्राप्त करें.”
राजनाथ ने सभा में मौजूद लोगों को इसका मतलब समझाते हुए कहा कि से सुनिए एक तरफ कांग्रेस माइनॉरिटी के युवाओं को बढ़ावा देगी ताकि शिक्षा, रोजगार, व्यापार, सेवा, खेल, कला और दूसरे क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़े. दूसरी तरफ़ यह सुनिश्चित करेगी कि उनको उनका हिस्सा मिले. यह काम कैसे होता है, कानूनी प्रावधान बना के, जो ‘इनश्योर’ शब्द के माध्यम से व्यक्त होता है. यानि कि अब ‘रिलीजन बेस्ड रिजर्वेशन’ को बैकडोर से लाने की कांग्रेस की तैयारी है. राजनाथ ने कहा कि उनकी चिंता इससे भी कहीं अधिक बड़ी है क्योंकि कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में जो कुछ भी ‘माइनॉरिटी वेलफेयर’ के नाम पर कहा है, वह ‘सच्चर कमेटी’ की रिपोर्ट से प्रभावित है. कांग्रेस सरकार में गठित हुई सच्चर कमेटी ने जब 2006 में रिपोर्ट दी थी, तो उसमें भारतीय सेना में भी मजहबी आधार पर गणना करने का सुझाव भी दिया था. स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला था कि सैन्य बलों में भी धार्मिक-मजहबी आधार पर विभाजन का प्रयास किया गया था. उस समय भाजपा विपक्ष में थी और पूरी ताक़त से हमने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का विरोध किया था. मगर कांग्रेस का असली चेहरा यही है. वह इस देश की हर संस्था, हर व्यवस्था में विभाजन करना चाहती है. हिंदू मुस्लिम करना चाहती है. भाजपा ने हमेशा इसका डट कर विरोध किया है.
राजनाथ सिंह ने कहा धर्म के नाम पर देश को बांटने वाली कांग्रेस आजादी के बाद पहले दिन से ही समाज को बांटने वाली तुष्टिकरण की राजनीति करती चली आ रही है. तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति कांग्रेस के डीएनए में है. राजनाथ सिंह ने कहा कि अब साल 2024 में कांग्रेस के मेनिफेस्टो के भीतर फिर से ‘मुस्लिम आरक्षण’ का दांव बड़ी चालाकी से चला गया है. हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने जब कांग्रेस की इस चालाकी को एक्सपोज़ कर दिया है तो कांग्रेस पार्टी उन्हीं पर हमला कर रही है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपना पूरा होमवर्क कर के आए थे. राजनाथ ने बताया कि जब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी तो उन्होंने ‘रंगनाथ मिश्र कमीशन’ और ‘सच्चर कमीशन’ का गठन किया था. इन दोनों कमीशनों का उद्देश्य था कि कैसे एक संप्रदाय विशेष को अल्पसंख्यक कल्याण के नाम पर तरजीह दी जाए. स्वयं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी ने कहा था कि इस देश के संसाधनों पर पहला अधिकार यदि किसी का है तो माइनॉरिटी का है और खासकर मुसलमानों का है. रक्षा मंत्री ने कहा कि यह असंवैधानिक है. दक्षिण भारत में पीएम मोदी समेत पूरी बीजेपी ने जमकर मेहनत की है. उत्तर भारत में कांग्रेस सिमट कर रह गयी है और उनकाका पूरा ध्यान दक्षिण भारत में मिलने वाली सफलता पर है. इसलिए इस बार कांग्रेस को बेनकाब करने का कोई मौका बीजेपी नहीं छोड़ रही है.