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रविवार को नाखून और बाल काटने से होते हैं ये भारी नुकसान, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती

News Desk
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हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है. सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का स्रोत माना जाता है. मान्यता है कि रविवार को नाखून और बाल काटने से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा कम हो जाती है कि किस दिन बाल और नाखून काटना शुभ होता है और किस दिन अशुभ.

अशुभ फल

ऐसा माना जाता है कि रविवार को नाखून और बाल काटने से व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

स्वास्थ्य समस्याएं: कुछ लोग मानते हैं कि रविवार को बाल काटने से सिर दर्द, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

धन हानि: मान्यता है कि रविवार को नाखून काटने से व्यक्ति को आर्थिक नुकसान हो सकता है.

मनोवैज्ञानिक समस्याएं: कुछ लोग मानते हैं कि रविवार को बाल काटने से व्यक्ति का आत्मविश्वास कम हो जाता है और वह चिंतित रहने लगता है.

व्यवसाय में बाधाएं: मान्यता है कि रविवार को नाखून काटने से व्यक्ति के व्यवसाय में बाधाएं आ सकती हैं.

अन्य दिनों में नाखून और बाल काटना

बुधवार: बुधवार को बाल, नाखून और कांटे कटवाना बहुत शुभ माना जाता है. बुध ग्रह बुद्धि का कारक होता है और इस दिन ऐसा करने से बुद्धि में वृद्धि होती है. साथ ही, घर में धन की वृद्धि भी होती है.

शुक्रवार: शुक्रवार को भी बाल, नाखून और कांटे कटवाना शुभ होता है. शुक्र ग्रह सुंदरता और वैभव का कारक होता है. इस दिन ऐसा करने से व्यक्ति सुंदर और आकर्षक बनता है.

मंगलवार: मंगलवार को भी बाल, नाखून और कांटे कटवाने से बचना चाहिए. मंगल ग्रह क्रोध का कारक होता है और इस दिन ऐसा करने से क्रोध में वृद्धि हो सकती है.

गुरुवार: गुरुवार को बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए. गुरु ग्रह ज्ञान का कारक होता है और इस दिन ऐसा करने से ज्ञान में कमी हो सकती है.

शनिवार: शनिवार को भी बाल, नाखून कटवाने से बचना चाहिए. शनि ग्रह कर्म का कारक होता है और इस दिन ऐसा करने से कर्मों का दुष्परिणाम भुगतना पड़ सकता है.

समय: बाल, नाखून कटवाने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना जाता है.

दिशा: बाल, नाखून कटवाते समय उत्तर या पूर्व दिशा में मुंह करके बैठना चाहिए.

उपाय: बाल, नाखून कटवाने के बाद गंगाजल से हाथ धो लेना चाहिए.

रविवार को नाखून और बाल काटने की मान्यताएं विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में पाई जाती हैं. हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. यह पूरी तरह से व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर करता है कि वह इन मान्यताओं को कितना महत्व देता है.

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