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धनतेरस पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान, होगा धनलाभ

NEWSDESK
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दीपोत्सव का पर्व पूरे पांच दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है. साथ ही, किसी भी वस्तु की खरीदारी के लिए यह दिन उत्तम माना गया है. इसी दिन लोग लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा भी खरीदते हैं. लेकिन कोई भी प्रतिमा नहीं खरीदनी चाहिए…

इस साल धनतेरस 10 नवंबर को मनाया जाएगा. धनतेरस के शुभ अवसर पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है. साथ ही माता लक्ष्मी, भगवान गणेश जी की भी पूजा करने से सौभाग्य और धन की प्राप्ति होती है. ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि धनतेरस हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. हर किसी को इस महापर्व का साल भर इंतजार रहता है.

आगे बताया कि दीपोत्सव का यह पर्व पूरे पांच दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है. इस दिन धन्वंतरि देव, लक्ष्मी जी और कुबेर महाराज की पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही, किसी भी वस्तु की खरीदारी के लिए यह दिन उत्तम माना गया है. मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई चल-अचल संपत्ति में तेरह गुना वृद्धि होती है.

धनतेरस पर ये जरूर खरीदें
इस दिन लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं. इसे शुभ माना जाता है. इस दिन चांदी या सोने की मूर्ति खरीद सकते हैं. धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा रही है. इसे शुभ माना जाता है. वहीं, घर के नए बर्तन खरीदने के लिए यह दिन शुभ माना जाता है. आप तांबे से बने बर्तन खरीदें और उन्हें पूर्व की दिशा में रखें.

मिट्टी या धातु की मूर्ति खरीदें
धनतेरस में पूजन के लिए मिट्टी की मूर्ति की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, इसलिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति मिट्टी की भी खरीद सकते हैं. लेकिन लक्ष्मी गणेश का विसर्जन नहीं किया जाता है, क्योंकि मां लक्ष्मी स्वयं धन की देवी हैं और भगवान गणेश विद्या के देवता माने जाते हैं, इसलिए इन दोनों का इस दिन विसर्जन नहीं किया जाता.

अष्टधातु से बनी मूर्तियां ही खरीदें
धनतेरस के दिन अष्टधातु से बनी मूर्तियां भी खरीद सकते हैं. अगर आप चाहें तो पीतल, चांदी की मूर्ति भी खरीद सकते हैं. लेकिन, कभी भी आपको पीओपी यानी प्लास्टर ऑफ पेरिस या प्लास्टिक की मूर्ति नहीं खरीदनी चाहिए.

गणेश जी की प्रतिमा में सूंड़ का रखें ध्यान
भगवान श्री गणेश की मूर्ति ऐसी खरीदें जिसमें उनकी सूंड बाईं ओर हो और साथ ही वह अपने हाथ में मोदक लिए हुए हों. श्री गणेश जी अपनी सवारी यानी चूहे पर विराजमान हों. अगर गणेश जी चूहे पर विराजमान न हों तो मूर्ति में साथ में चूहा जरूर खरीद लें.

लक्ष्मी जी की मूर्ति में इस बात का रखें ध्यान
मां लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय आपको इस बात का ध्यान रखना है कि मां लक्ष्मी हाथी या कमल के आसन पर विराजमान हों. साथ ही लक्ष्मी जी के हाथ से धन की वर्षा हो रही हो यानी हाथ से सिक्के गिर रहे हों.

धनतेरस 2023 तिथि पूजा मुहूर्त
धनतेरस इस साल 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से शुरू होगा. इस तिथि का समापन अगले दिन 11 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर होगा. धनतेरस के दिन पूजा प्रदोष काल में होती है, इसलिए धनतेरस 10 नवंबर को ही मनाया जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 8:00 बजे तक है.

 

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