Navratri 2023 : इस महत्वपूर्ण पर्व के दौरान कई परंपराएं अनुसरण की जाती हैं, जिनमें से एक जवारे की बोने की परंपरा है. पंडित से हम जानेंगे कि जवारे को कैसे बोना जाता है, ताकि यह हरा-भरा रहे.
कोरबाः नवरात्रि पर्व हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसमें नौ दिनों तक माता के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस महत्वपूर्ण पर्व के दौरान कई परंपराएं अनुसरण की जाती हैं, जिनमें से एक जवारे की बोने की परंपरा है. पंडित से हम जानेंगे कि जवारे को कैसे बोना जाता है, ताकि यह हरा-भरा रहे.
यदि आप कलश के आसपास जवारे बो रहे हैं, तो इसकी ये रही प्रक्रिया.
- एक बड़ा पात्र लें और इसे देवी की प्रतिमा के सामने कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर अक्षत से सजाएं.
- पात्र को देवी के मध्य में स्थापित करें, और कलश के चारों ओर की जगह को मिट्टी के मिश्रण से भर दें.
- जवारे की मिट्टी को लाकर इसे 50% देसी खाद के साथ मिलाएं, ताकि यह अधिक फ्यूंटिंग के साथ उगे.
- पात्र में मिट्टी की मोटी परत बिछाएं, फिर उस पर जौ का छिड़काव करें. फिर एक और परत मिट्टी के साथ डालें और हलके हाथों से मिलाएं.
- अब, पात्र के ऊपर हलके जल की छिड़काव करें, और अंत में उसे हलकी मिट्टी के साथ ढक दें. इस जवारे को दिन ब दिन जल प्रदान करें.
- अधिक संख्या में या अलग-अलग जवारे बोना चाहते हैं, तो मिट्टी के पात्रों का प्रयोग करें.
- एक बड़ी थाली में कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं और उस पर अक्षत चढ़ाकर रखें, उसके बाद मिट्टी के पात्रों को इनके ऊपर रखें.
- मिट्टी के पात्र छोटे और चौड़े होते हैं, इनमें थोड़ी मिट्टी डालकर जव क्षेत्र तैयार करें.
- पहले दिन, पात्रों को किसी बड़ी थाली से ढक दें, जिससे जवारों में नमी रहे.

