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तिकूल मौसम की मार से हल्दी की पैदावार घटने की आशंका…

NEWSDESK
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महाराष्ट्र में जिस तरह हल्दी की बोई गयी फसल को नुकसान हुआ है अब जबकि तमिलनाडु के उत्पादक क्षेत्रों से भी नुकसान की खबरें मिलने लगी है। दूसरी ओर पुराने माल काफी कट चुके हैं, इसे देखते हुए वर्तमान के मंदे वाले भाव आगे चलकर ढूंढते रह जाओंगे।

हल्दी में वायदे का व्यापार पिछले कई सालों से अपनी भूमिका निभाते हुए कारोबारियों को भारी घाटे में धकेल चुका है, लेकिन इस बार बिजाई कम होने के साथ-साथ सांगली लाइन में हल्दी की बोई गयी फसल को कहीं जबर्दस्त बाढ़ एवं कहीं भीषण बरसात से भारी नुकसान हुआ है। अभी तक की चर्चा में वहां की 50 प्रतिशत फसल नष्ट हो चुकी है।

दूसरी ओर तमिलनाडु के इरोड, कड़प्पा, दुग्गीराला, वारंगल लाइन में भी कई दिनों की लगातार बरसात से फसल कमज़ोर पड़ने लगी है। हल्दी की नई फसल फरवरी माह में प्रारंभ होंगी । अभी बिजाई होकर कुछ दिन समय बीता है तथा वर्तमान की बाढ़ से बोई गयी जमीन डूब गयी है। पानी निकलने के बाद बापस बिजाई का समय बीत जाएगा, क्योंकि एक माह से पहले हल चलने लायक भूमि नहीं रहेगी। पुरानी हल्दी इस बार काफी कट चुकी है।

कई वर्षो के स्टॉक के माल भी औने-पौने भाव में स्टॉकिस्ट माल बेच चुके हैं। वायदे में भी डिलीवरी कम होने से चालू माह के भाव आज 114 रुपए उछलकर 6994 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुए। यहां भी एजइटीज हल्दी जो 8100 रुपए बोल रहे थे, आज 8200 रुपए हो गयी तथा पुरानी हल्दी में भी 100 रुपए की तेजी दर्ज की गई।

उधर बढ़िया फली 9100/9200 रुपए बोलने लगे हैं। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हल्दी की कीमतों में 8/10 रुपए प्रति किलो की तेजी अगले एक से डेढ़ माह में देखने मिल सकती हैं।

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