Diwali Puja: 12 नवंबर को दिवाली मनाई जा रही है. दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेशजी की पूजा का सबसे अधिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि दिवाली के दिन यदि आप सच्चे मन से पूजन करते हैं, तो धन की देवी माता लक्ष्मी एवं बुद्धि के देवता गणेशजी आपसे प्रसन्न होंगे.
दिवाली की पूजा के समय किसी तरह की भूलचूक न हो इसके लिए पहले से ही पूजन विधि एवं पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट तैयार कर लीजिए. ऐसा करने से पूजा के समय गलती की संभावना नहीं रहेगी और विधि-विधान से पूजा संपन्न हो जाती है. अब कुछ दिनों बाद जल्द ही दिवाली आने वाली है. अगर आपने भी अभी तक पूजन के बारे में नहीं जाना है और सामग्री नहीं जुटाई है तो ज्योतिषाचार्य से जान लें.
आचार्य पं अविनाश मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष 12 नवंबर को दिवाली मनाई जा रही है. दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेशजी की पूजा का सबसे अधिक महत्व माना गया है. मान्यता है कि दिवाली के दिन यदि आप सच्चे मन से पूजन करते हैं, तो धन की देवी माता लक्ष्मी एवं बुद्धि के देवता गणेशजी आपसे प्रसन्न होंगे. दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशियां आती हैं. इसके लिए सबसे जरूरी है कि आपके पास पूजन की सभी सामग्री मौजूद हो एवं पूजन करने की विधि की जानकरी होनी चाहिए.
पूजा की आवश्यक सामग्री इस प्रकार
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पूजन में लकड़ी की चौकी, चौकी को ढकने के लिए लाल या पीला वस्त्र, देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां या चित्र ,कुमकुम, चंदन, हल्दी, रोली, अक्षत, पान एवं सुपारी, साबुत नारियल, अगरबत्ती, दीपक के लिए घी, पीतल का दीपक या मिट्टी का दीपक, कपास की बत्ती,पंचामृत,गंगाजल या नर्मदाजल, पुष्प, फल, कलश, आम के पत्ते, कपूर, कलावा, साबुत गेहूं के दाने,दूर्वा,जनेऊ,धूप,एक छोटी झाड़ू,दक्षिणा नोट और सिक्के,आरती की थाली
पूजन विधि इस प्रकार करें
पूजन के अनुसार दिवाली की सफाई के बाद घर के हर कोने को साफ करके गंगाजल या नर्मदाजल का छिड़काव कीजिए. इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल सूती कपड़ा बिछाएं और बीच में मुट्ठी भर अनाज रख लीजिए, फिर कलश को अनाज के बीच में रखें. कलश में पानी भरकर एक सुपारी, गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ अक्षत (चावल) के दाने डाल दीजिए. कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रख लीजिए. बीच में धन की देवी लक्ष्मी माता की मूर्ति एवं कलश के दाहिनी ओर भगवान गणेश जी की मूर्ति रखिये.
एक छोटी थाली में चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बना लें, हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रख दीजिए. इसके बाद अपने व्यापार, लेखा पुस्तक एवं अन्य धन,व्यवसाय से संबंधित वस्तुओं को मूर्ति के सामने रखिये. इसके बाद मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश जी को तिलक करें एवं दीपक जलाये उसके साथ ही कलश पर भी तिलक लगाएं. अब भगवान गणेश एवं लक्ष्मी को पुष्प चढ़ाएं.
पूजा इस प्रकार करें
पूजन के लिए अपनी हथेली में कुछ फूल रखिये. इसके बाद अपनी आंखें बंद करें एवं दिवाली पूजा मंत्र का पाठ कीजिये. हथेली में रखे फूल को भगवान गणेश एवं लक्ष्मी जी को चढ़ाएं. फिर माता लक्ष्मी की मूर्ति लें एवं उसे पानी से स्नान कराएं और उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं. मूर्ति को फिर से पानी से स्नान कराकर एक साफ कपड़े से पोछें एवं वापस रख दीजिए. इसके बाद मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम एवं चावल डालें. फूल की माला को देवी के गले में डालकर अगरबत्ती जलाएं. फिर नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित कीजिये.देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल एवं सिक्के रख दीजिए. थाली में दीया लीजिए एवं पूजा की घंटी बजाएं फिर माता लक्ष्मी जी की आरती कीजिये.

