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डिजिटल क्रांति से सुदृढ़ होता राजस्व प्रशासन- सुशासन और पारदर्शिता की नई सुबह…..

News Desk
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रायपुर: सुशासन की दिशा में अग्रसर राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन को डिजिटल बनाकर आम जनता के जीवन को सरल और चिंतामुक्त करने का एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू किया है। वह दौर अब बीते दिनों की बात हो चुका है, जब जमीन-जायदाद के कागजात दुरुस्त कराने, नामांतरण कराने या खसरा-नक्शा हासिल करने के लिए नागरिकों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। आज आधुनिक तकनीक के समन्वय से राजस्व सेवाएं न केवल पारदर्शी हुई हैं, बल्कि सीधे नागरिकों की पहुंच में आ चुकी हैं।

19 हजार 723 गांवों के भू – नक्शों का पूर्णतः कंप्यूटरीकृत

​छत्तीसगढ़ में भुईयां और भू-नक्शा डिजिटल पहल के तहत प्रदेश के 20 हजार 298 गांवों के खसरा एवं 19 हजार 723 गांवों के भू-नक्शों का पूर्णतः कंप्यूटरीकरण कर लिया गया है। इससे शुद्ध और प्रामाणिक भू-अभिलेख तुरंत उपलब्ध हो रहे हैं। डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)  के माध्यम से राज्य की स्वीकृत 172 तहसीलों में से 158 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम का निर्माण पूरा हो चुका है। भू-अभिलेखों के डिजिटल सुरक्षित संधारण से अभिलेखों के फटने, खराब होने या गुम होने की पुरानी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो गई है।

पक्षकारों के मोबाइल पर एसएमएसके माध्यम से सुनवाई की तारीख

न्यायिक प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ई-कोर्ट व्यवस्था लागू की गई है। इसके माध्यम से नागरिक अब घर बैठे भूमि संबंधी विवादों के निपटारे के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से लेकर अंतिम फैसले तक की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। यही नहीं, पेशी की अगली तारीख की सूचना भी पक्षकारों को सीधे उनके मोबाइल पर एसएमएस (SMS) के जरिए भेज दी जाती है।

वर्ष 2025 से लागू की गई ‘ऑटो नामांतरण’ व्यवस्था

प्रशासनिक सुगमता का एक और उत्कृष्ट उदाहरण पंजीयन और नामांतरण प्रणाली का एकीकरण है। राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालय अब भुईयां पोर्टल से सीधे जुड़ चुके हैं। वर्ष 2025 से लागू की गई ‘ऑटो नामांतरण’ (Auto Mutation) व्यवस्था के तहत जमीन की रजिस्ट्री होते ही क्रेता के नाम पर नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित इस प्रणाली से ऑफलाइन नामांतरण में लगने वाले समय और अनावश्यक परेशानियों से नागरिकों को स्थायी राहत मिल रही है।

गाइडलाइन दर का निर्धारण स्वचालित प्रणाली से 

​भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को भी ‘ऑटो व्यपवर्तन’ (Auto Diversion) के जरिए बेहद सरल बनाया गया है, जहाँ आवेदन मिलने के मात्र 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। गाइडलाइन दरों और प्रीमियम दरों का निर्धारण भी अब स्वचालित प्रणाली से संपन्न होता है।

डिजिटल किसान पुस्तिका उपलब्ध

किसानों के हित में एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए भुईयां पोर्टल पर डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका उपलब्ध कराई जा रही है। पटवारी और उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर से युक्त यह प्रमाणित दस्तावेज़ सिस्टम द्वारा स्वतः तैयार हो जाता है। आगामी समय में इसे सिविल न्यायालयों से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे भूमि से जुड़े किसी भी अदालती स्थगन या आदेश की अद्यतन जानकारी इसमें पारदर्शी रूप से दर्ज रहेगी।

खसरा व बी-1 की​ डिजिटल सुलभता 

​डिजिटल सुलभता की इस कड़ी को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए खसरा व बी-1 जैसे सभी मुख्य दस्तावेज़ अब व्हाट्सएप चैटबॉट (WhatsApp Chatbot) पर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। निश्चित तौर पर, तकनीक आधारित इस राजस्व क्रांति ने न केवल समय और धन की बचत की है, बल्कि प्रदेश में सुशासन, प्रामाणिकता और पारदर्शिता की एक नई मिसाल पेश की है।

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