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एनसीएएचपी तीन साल बाद भी लागू नहीं……केंद्र और राज्यों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट 

News Desk
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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल से जुड़ी सेवाओं पर नियंत्रण संबंधी कानून बनने के तीन साल बाद भी लागू नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाए कि केंद्र ने करीब एक साल पहले नोटिस के बावजूद जवाब तक पेश नहीं किया। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा वृत्ति आयोग अधिनियम, 2021 (एनसीएएचपी) के प्रावधानों को 12 अक्टूबर तक लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाएं। संसद में 2021 में पारित इस कानून से मेडिकल एवं रेडियोलोजी लैब, फिजियोथैरेपी, पोषण विज्ञान जैसी शिक्षा एवं सेवाओं को रेगुलेट किया जाना है।
कानून को लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के संस्थान बढ़ते जा रहे हैं जो और इनके बेतहाशा प्रसार को रोकने के लिए कानून लाया गया है। तीन साल बाद भी कानून लागू नहीं कर केंद्र और राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं। केवल 14 राज्यों ने काउंसिलों का गठन किया है लेकिन वे भी निष्क्रिय हैं। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी ने जवाब के लिए समय मांगा, तब सीजेआई ने नाराजगी जाहिर कर कहा नोटिस सितंबर 2023 में जारी किया गया था, आपने अब तक क्या किया?

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