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Explainer: एमपी में इन सीटों पर दिलचस्प हुआ लोकसभा चुनाव, कौन से उम्मीदवार ला सकते हैं मुकाबले में ट्विस्ट

NEWSDESK
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मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच राजनीतिक पार्टियों जीतने की हर जुगत कर रही हैं. प्रदेश में कई लोकसभा सीटों पर मुकाबला रोचक हो गया है. प्रदेश की छिंदवाड़ा, राजगढ़, रतलाम-झाबुआ, सागर सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार तय होने से मुकाबला कड़ा और दिलचस्प हो गया है. कांग्रेस का कहना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी छह लोकसभा सीटें हैं जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के विधायक ज्यादा रहे हैं. अब लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं तो मुकाबला कड़ा होता हुआ दिखाई दे रहा है. जनता का ध्यान इलेक्टरल बॉन्ड, 2 करोड़ लोगों को रोजगार, गैस सिलेंडर के दाम और महंगाई पर जा सकता है.

वहीं, बीजेपी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपना अस्तित्व बचाने के लिए चुनाव लड़ती हुई दिख रही है. किसी भी क्षेत्र पर कोई संघर्ष नहीं दिख रहा है. भोपाल में दिग्विजय सिंह चार लाख वोटों से हारे थे. पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह 20 साल से कोई चुनाव नहीं जीते हैं. बीजेपी का कहना है कि छिंदवाड़ा प्रधानमंत्री की गारंटीयों का सबसे बड़ा गढ़ बन चुका है. जनता समझ चुकी है कि छिंदवाड़ा में केंद्र और राज्य सरकारों की कोशिशें से ही विकास हुआ है. वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता का कहना है कि एमपी में 5 से 7 ऐसी सीटें हैं जहां कांग्रेस मजबूत स्थिति में है. 2009 में कांग्रेस 12 सीटों पर मजबूत थी. धीरे-धीरे कांग्रेस की सीटें घटती चली गईं. विधानसभा चुनाव में रिजल्ट आया, जहां 10 लोकसभा सीटें प्रभावित हुईं, वहां कांटे के मुकाबले की स्थिति है. धार और रतलाम झाबुआ लोकसभा सीट पर मुकाबला कड़ा है. मंडला डिंडोरी सीट पर भी मुकाबला रोचक है.

छिंदवाड़ा से नकुलनाथ बनाम बीजेपी के विवेक बंटी साहू: नकुलनाथ 2019 का चुनाव केवल 37 हजार वोटों से जीते थे. जबकि कमलनाथ 9 बार छिंदवाड़ा से सांसद रहे. छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र में 16 लाख 32 हजार वोटर हैं. 8 लाख 24 हजार पुरुष तो 8 लाख 8 हजार महिला वोटर हैं. छिंदवाड़ा में 37 फीसदी आबादी एसटी, जबकि 12 फीसदी आबादी एससी और मुस्लिम आबादी करीब 5 फीसदी है. जबकि, ग्रामीण वोटर 75 फीसदी हैं. छिंदवाड़ा में कांग्रेस को बीजेपी से कड़ी चुनौती मिल रही है. बीजेपी से चुनावी मैदान में उतरे विवेक बंटी साहू होटल, सर्राफा व्यवसाय और कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं. वे 2019 विधानसभा चुनाव में कमलनाथ से केवल 25 हजार वोटों से हारे थे, जबकि 2023 में 34 हजार वोटों से हारे. कमलनाथ के करीबी दीपक सक्सेना, सैय्यद जाफर जैसे कई नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं. विधानसभा से पहले मोनिका बट्टी ने कांग्रेस छोड़ी थी.

राजगढ़ में दिग्विजय सिंह बनान बीजेपी के रोडमल नागर: राजगढ़ दिग्विजय सिंह का गढ़ कहा जाता है. दिग्विजय सिंह 1984 और 1994 में सांसद रहे. उनके भाई लक्ष्मण सिंह राजगढ़ से 5 बार सांसद रहे हैं. अब 33 साल बाद खुद दिग्विजय सिंह चुनावी मैदान में हैं. हालांकि, राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में आने वाली 8 विधानसभा में से 6 विधानसभा पर बीजेपी का कब्जा है. इनमें चाचोड़ा, राघोगढ़, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर, सारंगपुर और सुसनेर विधानसभा शामिल हैं. हालांकि, 1967 से 1980 तक यहां हिंदुत्ववादी पार्टियों का वर्चस्व रहा.. 2014 और 2019 में राजगढ़ लोकसभा से बीजेपी जीती. लेकिन इस बार दिग्विजय सिंह के मैदान में आने से मुकाबला रोचक हो गया है.

रतलाम-झाबुआ में कांग्रेस से कांतिलाल भूरिया बनाम बीजेपी की अनीता नागर चौहान: कांतिलाल भूरिया की पहचान बड़े आदिवासी नेता के तौर पर है. रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट पर कांतिलाल भूरिया 5 बार सांसद रहे हैं. ,लेकिन 2014 में बीजेपी के दिलीप सिंह भूरिया से हारे और 2019 में गुमान सिंह डामोर ने उन्हें चुनावी शिकस्त दी. इस बार बीजेपी नेता अनीता नागर चौहान उन्हें चुनौती दे रही हैं. अनीता सरकार में मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी हैं. वे जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. साल 2023 विधानसभा चुनाव में यहां चार बीजेपी, 3 कांग्रेस और एक बीएपी जीती है. रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट में अलीराजपुर, जोबट, झाबुआ, ठंडला, पेटलावाद, रतलाम रूरल, रतलाम सिटी और सैलाना विधानसभा शामिल हैं.

सागर में कांग्रेस के गुड्डू राजा बुंदेला बनाम बीजेपी की लता वानखेड़े: कांग्रेस ने चंद्रभूषण सिंह बुंदेला उर्फ गुड्डू राजा को टिकट देकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. गुड्डू राजा करीब 6 महीने पहले ही बहुजन समाज पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. उनके पिता सुजान सिंह बुंदेला भी कांग्रेस से सांसद रहे हैं. इस परिवार का दबदबा पूरे बुंदेलखण्ड में माना जाता है. विधानसभा चुनाव में भी यह परिवार लगातार सक्रिय है. बीजेपी से मैदान में आईं लता वानखेड़े तीन बार सरपंच का चुनाव जीत चुकी हैं. वे बीजेपी संगठन में कई पदों पर रहीं हैं. लता वानखेड़े सागर महिला मोर्चा की अध्यक्ष, फिर बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रह चुकी हैं.

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