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डोंगरगढ़-खैरागढ़ सड़क पर कांग्रेस का चक्काजाम: जहां भाजपा ने किया जाम अब कांग्रेस का धरना

News Desk
3 Min Read

खैरागढ़

आठ वर्षों से मौत के गड्ढों में तब्दील हो चुकी डोंगरगढ़-खैरागढ़ मुख्य सड़क पर रविवार को कांग्रेस ने चक्काजाम कर प्रदर्शन किया. विरोध का नेतृत्व कर रहीं डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल खुद सड़क पर बैठ गईं. वर्षों से आवाजाही और विकास की राह रोक कर बैठी यह सड़क अब राजनीति का मंच बन चुकी है, जहां पहले भाजपा प्रदर्शन करती थी, अब वहीं कांग्रेस कर रही है.

दरअसल, खैरागढ़ जिला मुख्यालय को धर्मनगरी डोंगरगढ़ और महाराष्ट्र से जोड़ने वाली यह सड़क ढारा से सिदार खपरी तक इतनी जर्जर है कि सड़क में गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ रही है. बरसात में इन गड्ढों में पानी भरने से हादसों का डर बना रहता है. मां बमलेश्वरी और करेला भवानी मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी खस्ताहाल सड़क से होकर गुजरना पड़ता है.

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता का कहना है कि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की है और इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है. वहीं, विभागीय पत्राचार के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. सरकारी कागजों में सड़क बनी रहती है, जमीनी हकीकत में गड्ढे और धूल उड़ती रहती है.

गड्डों वाली सड़क बनी फोटो खिंचवाने और बयानबाजी का मंच

बीते पांच वर्षों में कांग्रेस की सरकार थी तो भाजपा ने इसी सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया, आज भाजपा की सरकार है तो कांग्रेस सवाल उठा रही है. इस बीच सड़क पर नारे बदलते गए, नेता बदलते गए, लेकिन गड्ढे वहीं के वहीं रह गए. यह सड़क अब जनता के लिए आवाजाही का मार्ग नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए फोटो खिंचवाने और बयानबाजी का मंच बन गई है. जब सत्ता में रहते हैं, तब फाइलें चुप रहती हैं, सड़कें टूटी रहती हैं. विपक्ष में जाते ही सड़कें भी याद आने लगती हैं, और जनता भी. इस सड़क पर गिरते संभलते लोगों के मन में अब सिर्फ एक सवाल है – सड़क कब बनेगी? या यह सड़क हमेशा सत्ता और विपक्ष की राजनीति में पिसती रहेगी, और जनता गड्ढों में गिरकर ही हर बार चुनावी वादे याद करती रहेगी?

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