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CG NEWS- “नारी गरिमा का उत्सव”: छत्तीसगढ़ में सामाजिक क्रांति का प्रतीक बनी महतारी वंदन योजना…

News Desk
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रायपुर: छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर, जहां मातृत्व की ममता और नारीत्व की गरिमा सदियों से पूजनीय रही है, वहीं आज एक नई सामाजिक क्रांति आकार ले रही है, महतारी वंदन योजना के रूप में। यह केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि नारी गरिमा, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का महोत्सव बन गई है, जिसने राज्य की लाखों महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन जीने की दिशा दी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 10 मार्च 2024 को महतारी वंदन योजना का शुभारंभ करते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की हर माँ, बहन और बेटी को मुख्यधारा में लाने का संकल्प है। उन्होंने इसे “नारी गरिमा का उत्सव” कहा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की सक्रिय भागीदारी से यह योजना बहुत ही कम समय में जन-आंदोलन में परिवर्तित हो गई। शासन की प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और समर्पण ने इसे घर-घर तक पहुंचा दिया।

विशेष लेख :महतारी वंदन योजना - नारी सशक्तिकरण की नयी मिसाल

आंकड़ों से आगे बढ़ती कहानी:

मार्च 2024 से जुलाई 2025 तक कुल 17 किश्तों में लगभग 70 लाख महिलाओं को 11 हजार 08 करोड़ रूपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। यह केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उन सपनों की पूंजी है जिन्हें अब तक परिस्थितियों ने दबा दिया था। योजना से महिलाओं को जो आत्मबल मिला, उसने उनके जीवन को नए आयाम दिए।

आर्थिक स्वावलंबन का रास्ता:

आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं। किसी ने छोटा व्यवसाय शुरू किया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों को सहजता से पूरा किया। यह आर्थिक संबल महिलाओं को आत्मविश्वास, सामाजिक पहचान और सम्मान दे रहा है। वे अब केवल पारंपरिक भूमिकाओं में सीमित नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक रीढ़ और समाज की निर्णायक शक्ति बनती जा रही हैं।

हर गांव की नारी, अब प्रेरणा की अधिकारी:

योजना की असली तस्वीर उन कहानियों में है, जो अब गांव-गांव में प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं श्रीमती कंचन जो ग्राम गीधा, मुंगेली की निवासी हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना से मिलने वाले पैसों से गुपचुप ठेला व्यवसाय को बढ़ाया और अब घर की ज़िम्मेदारियाँ आसानी से निभा रही हैं।
कुरूद ग्राम की निवासी श्रीमती श्यामा बाई जो कंडरा जनजाति से आती हैं और बांस शिल्प के पारंपरिक व्यवसाय से अब आजीविका चलाती हैं। योजना की सहायता अपने व्यवसाय को बढ़ाकर 8000 रुपए तक मासिक आमदनी अर्जित कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर

मोहला-मानपुर की ग्राम दिघवाड़ी निवासी श्रीमती गीता यादव कहती हैं कि सालाना मिलने वाले 12 हजार रूपए हमारी कई जरूरतों को पूरा करने में मददगार होंगे। इससे रोजमर्रा के खर्च, बच्चों के दवाइयों और पढ़ाई का समान खरीदने में राहत मिलेगी।
ग्राम हथरा निवासी श्रीमती कान्ति बाई ने कहा कि महतारी वंदन योजना से मिली राशि से वह अपनी और घर की जरूरतें पूरी कर सकेंगी। अब उन्हें छोटी-मोटी चीजों के लिए बार-बार पति से कहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस योजना को महिलाओं को केवल सहायता नहीं, बल्कि समाज में भागीदारी का अधिकार देने वाला प्रयास बताया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील सोच और जमीनी सक्रियता ने इसे नीतिगत घोषणा से निकालकर समाज की धड़कन बना दिया है।

छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर

एक नई सुबह की दस्तक:

आज जब हम छत्तीसगढ़ की गलियों और घरों में झांकते हैं, तो वहां हमें आंकड़ों से परे एक विश्वास, आत्मबल और आशा की कहानी दिखाई देती है। महतारी वंदन योजना अब केवल सरकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज की मुस्कान बन गई है। छत्तीसगढ़ की हर माँ-बेटी की आवाज़ में अब यह आत्मविश्वास झलकता है।

’’अब हर महतारी सशक्त है, अब हर बेटी समर्थ है।’’

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