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CG Chunav 2023: बीजेपी जीती तो कौन होगा छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री, क्या इनमें से हो सकता है कोई एक नाम?

NEWSDESK
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छत्तीसगढ़ में बीजेपी बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ रही है। बीजेपी यदि जीत जाती है तो वह सीएम किसे बनाएगी इस बारे में अटकलें लग रही हैं। आइए जानते हैं कि कौन हो सकते हैं वो पांच चेहरे?

छत्तीसगढ़ बीजेपी मुख्ममंत्री चेहरे के बिना विधानसभा चुनाव लड़ रही है। एक तरफ कांग्रेस के पास स्पष्ट रुप से मुख्यमंत्री का चेहरा है तो दूसरी ओर बीजेपी मोदी और पार्टी के विजन पर यह चुनाव लड़ रही है। जिस तरह केंद्र में बीजेपी कांग्रेस से पूछती है कि उनका पीएम का चेहरा कौन होगा उसी तर्ज पर यह सवाल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बीजेपी से करती आ रही है। अंततः चुनाव का ऊंट किस करवट बैठता है यह नहीं कहा जा सकता। पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि बीजेपी को राज्य में सत्ता मिल जाती है तो उस हालत में वह किसे मुख्यमंत्री बनाएगी? लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके और पूरे राज्य से परिचित रमन सिंह एक बार फिर से बीजेपी की च्वाइस होंगे या बीजेपी किसी आदिवासी पर अपना दांव लगाएगी। वह किसी सांसद को मौका देगी या ब्यूरोक्रेसी को छोड़कर राजनीति में आए एक ब्यूरोक्रेट को।

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छत्तीसगढ़ में बीजेपी बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ रही है। बीजेपी यदि जीत जाती है तो वह सीएम किसे बनाएगी इस बारे में अटकलें लग रही हैं। आइए जानते हैं कि कौन हो सकते हैं वो पांच चेहरे?पूर्व सीएम को नहीं कर सकते हैं खारिजअपने अध्यक्ष पर दांव लगा सकती है बीजेपीCG Chunav 2023: बीजेपी जीती तो कौन होगा छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री, क्या इनमें से हो सकता है कोई एक नाम?छत्तीसगढ़ में बीजेपी बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ रही है। बीजेपी यदि जीत जाती है तो वह सीएम किसे बनाएगी इस बारे में अटकलें लग रही हैं। आइए जानते हैं कि कौन हो सकते हैं वो पांच चेहरे? केंद्रीय नेतृत्व के प्रिय बघेलपूर्व सीएम को नहीं कर सकते हैं खारिजअपने अध्यक्ष पर दांव लगा सकती है बीजेपी

राज्य में कयास यह भी हैं कि बीजेपी महाराष्ट्र और हरियाणा मॉडल की तरह कोई ऐसा नाम सामने लेकर आ सकती है जिसकी दूर-दूर तक कहीं कोई चर्चा ना रही हो। टिकट बंटवारे के ज्यातादर फैसले हाईकमान से ही हुए हैं। ऐसी हालत में विधायकों की किसी एक नेता के साथ गोलबंदी दिखे ऐसा होता भी नहीं दिख रहा है। आइए इस बात का एनालिसिस करते हैं कि बीजेपी यदि सत्ता में आती है तो उसके पास पांच वो कौन से नाम हैं जिन्हें वह मुख्मंत्री बना सकती है।

विजय बघेल की उम्मीदवारी मजबूत है। उसकी दो वजहें हैं। विजय बघेल सीएम भूपेश बघेल की ही जाति ओबीसी की कुर्मी समाज से आते हैं। वह मुख्यमंत्री के खिलाफ पाटन से ताल ठोंक रहे हैं। सासंद हैं। साफ-सुथरी छवि है। राज्य के स्थानीय नेताओं का विरोध नहीं है। हाईकमान के विश्वस्त माने जाते हैं। राजनीति जानकार बताते हैं कि उनके खिलाफ एक ही चीज जाती है कि उनकी अपील पूरे छत्तीसगढ़ में नहीं है। वह एक क्षेत्र के ही नेता हैं।

पूर्व सीएम को नहीं कर सकते हैं खारिज

तीन बार के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह को भले ही पार्टी ने मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया लेकिन उनकी प्रत्याशिता को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक टीकाकार रवि भोई कहते हैं कि शुरुआती समय में रमन सिंह जरुर बीजेपी में उपेक्षित थे लेकिन जब चुनाव बेहद करीब आया तो हाईकमान ने टिकट देने में रमन सिंह की भी सुनी। केंद्रीय नेतृत्व यह बात जानता है कि रमन सिंह तीन कार्यकाल सरकार चला चुके हैं और उन्हें राज्य चलाने की बेहतर समझ है। वह राज्य में लोकप्रिय रहे हैं। भले ही 2018 का चुनाव हारने के बाद उनकी सक्रियता कुछ कम रही हो लेकिन मुख्यमंत्री चुनते समय उनके अनुभव को दरकिनार कर देना कठिन होगा।

अपने अध्यक्ष पर दांव लगा सकती है बीजेपी

CG Chunav 2023: बीजेपी जीती तो कौन होगा छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री, क्या इनमें से हो सकता है कोई एक नाम?

छत्तीसगढ़ में बीजेपी बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ रही है। बीजेपी यदि जीत जाती है तो वह सीएम किसे बनाएगी इस बारे में अटकलें लग रही हैं। आइए जानते हैं कि कौन हो सकते हैं वो पांच चेहरे?

छत्तीसगढ़ बीजेपी मुख्ममंत्री चेहरे के बिना विधानसभा चुनाव लड़ रही है। एक तरफ कांग्रेस के पास स्पष्ट रुप से मुख्यमंत्री का चेहरा है तो दूसरी ओर बीजेपी मोदी और पार्टी के विजन पर यह चुनाव लड़ रही है। जिस तरह केंद्र में बीजेपी कांग्रेस से पूछती है कि उनका पीएम का चेहरा कौन होगा उसी तर्ज पर यह सवाल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बीजेपी से करती आ रही है। अंततः चुनाव का ऊंट किस करवट बैठता है यह नहीं कहा जा सकता। पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि बीजेपी को राज्य में सत्ता मिल जाती है तो उस हालत में वह किसे मुख्यमंत्री बनाएगी? लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके और पूरे राज्य से परिचित रमन सिंह एक बार फिर से बीजेपी की च्वाइस होंगे या बीजेपी किसी आदिवासी पर अपना दांव लगाएगी। वह किसी सांसद को मौका देगी या ब्यूरोक्रेसी को छोड़कर राजनीति में आए एक ब्यूरोक्रेट को।

राज्य में कयास यह भी हैं कि बीजेपी महाराष्ट्र और हरियाणा मॉडल की तरह कोई ऐसा नाम सामने लेकर आ सकती है जिसकी दूर-दूर तक कहीं कोई चर्चा ना रही हो। टिकट बंटवारे के ज्यातादर फैसले हाईकमान से ही हुए हैं। ऐसी हालत में विधायकों की किसी एक नेता के साथ गोलबंदी दिखे ऐसा होता भी नहीं दिख रहा है। आइए इस बात का एनालिसिस करते हैं कि बीजेपी यदि सत्ता में आती है तो उसके पास पांच वो कौन से नाम हैं जिन्हें वह मुख्मंत्री बना सकती है।

 केंद्रीय नेतृत्व के प्रिय बघेल

विजय बघेल की उम्मीदवारी मजबूत है। उसकी दो वजहें हैं। विजय बघेल सीएम भूपेश बघेल की ही जाति ओबीसी की कुर्मी समाज से आते हैं। वह मुख्यमंत्री के खिलाफ पाटन से ताल ठोंक रहे हैं। सासंद हैं। साफ-सुथरी छवि है। राज्य के स्थानीय नेताओं का विरोध नहीं है। हाईकमान के विश्वस्त माने जाते हैं। राजनीति जानकार बताते हैं कि उनके खिलाफ एक ही चीज जाती है कि उनकी अपील पूरे छत्तीसगढ़ में नहीं है। वह एक क्षेत्र के ही नेता हैं।

पूर्व सीएम को नहीं कर सकते हैं खारिज

तीन बार के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह को भले ही पार्टी ने मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया लेकिन उनकी प्रत्याशिता को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक टीकाकार रवि भोई कहते हैं कि शुरुआती समय में रमन सिंह जरुर बीजेपी में उपेक्षित थे लेकिन जब चुनाव बेहद करीब आया तो हाईकमान ने टिकट देने में रमन सिंह की भी सुनी। केंद्रीय नेतृत्व यह बात जानता है कि रमन सिंह तीन कार्यकाल सरकार चला चुके हैं और उन्हें राज्य चलाने की बेहतर समझ है। वह राज्य में लोकप्रिय रहे हैं। भले ही 2018 का चुनाव हारने के बाद उनकी सक्रियता कुछ कम रही हो लेकिन मुख्यमंत्री चुनते समय उनके अनुभव को दरकिनार कर देना कठिन होगा।

अपने अध्यक्ष पर दांव लगा सकती है बीजेपी

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव सीएम पद के लिए भी दावेदार बन सकते हैं। अरुण साव ओबीसी समाज से आते हैं। सीधे-सरल हैं। पार्टी के अंदर की गुटबाजी में विश्वास नहीं करते। इन चुनावों के 6 महीने बाद ही लोकसभा के चुनाव होने हैं। बीजेपी को एक साफ सुथरी छवि वाला ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए जो हाईकमान के निर्देश को पूरी तरह से अमल में लेकर आए। इसके लिए साव बेहतर व्यक्ति हो सकते हैं। ओबीसी की जिस जाति से वह आते हैं उसकी संख्या छत्तीसगढ़ में ठीक-ठाक है। जातीय समीकरणों का लाभ भी उनके पक्ष में जा सकता है।

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