Google Analytics —— Meta Pixel

’सल्फी को नई पहचान देने की कोशिश : बस्तर के हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग’, ’इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में मिला सम्मान, सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर कर रहे काम’…..

News Desk
3 Min Read

रायपुर: बस्तर की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक पेय “सल्फी” को नई वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में स्थापित करने की दिशा में युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” में उनके इस प्रयोग को विशेष सराहना मिली और उन्हें मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा “न्यू इनोवेशन अवार्ड” में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया है।

हर्षवर्धन “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से सल्फी पेय की सेल्फ लाइफ बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि यह केवल पारंपरिक पेय तक सीमित न रहकर स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक ड्रिंक के रूप में भी पहचान बना सके।

उन्होंने बताया कि सल्फी का रस पेड़ से निकालने के कुछ समय बाद ही प्राकृतिक रूप से किण्वित होने लगता है, जिससे यह हल्का मादक पेय बन जाता है। यही कारण है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। हर्षवर्धन ने अपने प्रयोगों के माध्यम से इस फरमेंटेशन प्रक्रिया की अवधि को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है, जिससे सल्फी की मूल गुणवत्ता और स्वाद को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

 ’सल्फी को नई पहचान देने की कोशिश : बस्तर के हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग’

’बस्तर की संस्कृति से जुड़ी है सल्फी’

सल्फी बस्तर की आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इसे स्थानीय लोग “बस्तर बीयर” के नाम से भी जानते हैं। यह कैरियोटा यूरेन्स नामक ताड़ प्रजाति के पेड़ से निकलने वाला मीठा रस है। ताजा सल्फी का स्वाद नारियल पानी की तरह मीठा और ताजगी भरा होता है, लेकिन कुछ घंटों बाद इसमें प्राकृतिक खमीर बनने लगता है, जिससे यह हल्का नशीला हो जाता है। ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सल्फी का सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर विशेष महत्व है। विवाह, पारंपरिक उत्सव और सामाजिक आयोजनों में इसे प्रमुखता से परोसा जाता है। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सल्फी पर निर्भर है। स्थानीय लोग इसे पेट संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी भी मानते हैं।

’जीआई टैग दिलाने का सपना’

हर्षवर्धन का सपना है कि बस्तर की इस पारंपरिक पेय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले। वे चाहते हैं कि सल्फी को स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक पेय के रूप में प्रचारित किया जाए और भविष्य में इसे बस्तर के लिए जीआई टैग भी प्राप्त हो। उनका मानना है कि यदि सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाए, तो यह बस्तर के आदिवासी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

Share this Article