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आपकी स्लीपिंग पोजीशन सेहत पर डालती है विपरीत प्रभाव

NEWSDESK
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कहते हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है लेकिन क्या आप इस बात से वाकिफ हैं कि आपके सोने का तरीका भी आपके स्वास्थ्य को काफी हद तक प्रभावित करता है। नहीं न, लेकिन यह सच है। आपकी स्लीपिंग पोजिशन के कारण भी आपको बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

कुछ लोगों को छाती के बल सोना काफी अच्छा लगता है। अगर आप भी छाती के बल सोते हैं तो आपको आज ही अपनी इस आदत को बदल देना चाहिए। दरअसल, इससे आपकी लोअर बैक पर अतिरिक्‍त खिंचाव पड़ता है। और साथ ही गर्दन और कंधे की पॉश्‍चर भी ज्‍यादा जोर पड़ता है। ऐसे लोग अक्सर दर्द की शिकायत करते हैं। वैसे जिन लोगों को खर्राटे लेने की आदत होती है, उनके लिए छाती के बल सोना फायदे का सौदा हो सकता है।

बच्चे की तरह सोने की मुद्रा को सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है क्योंकि ऐसे में आप रात में कभी भी आराम से करवट बदल सकते हैं और इससे रीढ़ पर जोर नहीं पड़ता। ऐसे सोने वाले लोग सुबह उठाकर ज्यादा तरोताजा महसूस करते हैं। इस तरह से सोना गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी होता है खासतौर से बायीं तरफ।

वहीं पीठ के बल सोने पर आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है। साथ ही यह पोजिशन पेट में एसिड नहीं बने देती है क्योंकि यह अन्नमय और पेट को कम करती है। वहीं दूसरी ओर, इस पोजिशन में सोने के कुछ नुकसान भी हैं। जो लोग पीठ के बल सोते हैं|

उनमें खर्राटे लेने की समस्या बढ़ जाती है और यहां तक कि स्लीप ऐप्निया के शिकार हो सकते हैं। क्यों कि इस तरह सोने से आपकी जीभ अंदर की तरफ चली जाती है। इसके अलावा यह पीठ के निचले हिस्से दर्द को बढ़ा सकता है।

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