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छत्तीसगढ़ : इस अधिकारी के कई ठिकानों पर EOW की दबिश, नान घोटाला मामले में कार्रवाई तेज

NEWSDESK
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित करोड़ों रुपए के नान (नागरीक आपूर्तीि निगम) घोटाला मामले में ईओडबल्यू (Economic Offences Wing) की टीम ने तत्कालीन नान प्रबंधक के ठिकानों पर दबिश दी है. बताया जा रहा है कि ईओडबल्यू (EOW) की टीम (Team) ने कांकेर(Kanker) के तत्कालीन प्रबंधक चिंतामणी चंद्राकर के दुर्ग, कांकेर और बेंगलुरु के मकान में दबिश देकर जांच कर रही है.जनवरी में हुए एसआईटी (SIT-Special Investigation Team) के गठन के बाद से ही ईओडबल्यू की टीम इस मामले में लगातार जांच कर रही है. कहा जा रहा है कि चिंतामणी चंद्राकर (Chintamani Chandrakar) पर आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate assets) और नान मामले में शामिल होने का आरोप लगा है. गौरतलब हो कि हाल ही में नान के नया रायपुर(Naya Raipur) स्थित दफ्तर में भी अधिकारियों की टीम ने दस्तावेज(Documents) जब्त की थी जिसके बाद इस मामले की कार्रवाई (Action) में तेजी आई है.

. 12 फरवरी 2015 को नान के दफ्तर में छापा पड़ने पर हुआ मामले का खुलासा.

. 27 मार्च 2015 को एसीबी ने छापा मार नान से जुड़े 12 लोगों को गिरफ्तार किया. . अप्रैल 2015 को खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस आलोक शुक्ला, और नान के तात्कालिक एमडी अनिल टुटेजा को बयान के लिए नोटिस जारी.

. जून 2015 में एसीबी ने 214 गवाहों के नाम के साथ 16 आरोपियों के खिलाफ 5 हजार पन्नों का चालान पेश किया.

. जून 2015 में केंद्र सरकार को आलोक शुक्ला और अनिट टुटेजा के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी गई. . नान का मामला जिला न्यायालय से हाईकोर्ट और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

. जुलाई 2015 में राज्य सरकार ने धारा 109, 120 (बी), 420 और 409 के तहत IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा पर अभियोन की स्वीकृति दी.

. अगस्त 2016 में केंद्रीय कार्मिक एंव प्रशिक्षण मंत्रालय (DOPT) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 19 के तहत अभियोनज की स्वीकृती दी.

. एसीबी ने दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ 35 पन्नों का पूरक चालान पेश किया.

. 5 दिसंबर 2018 को दोनों आईएएस के कोर्ट में पेश नहीं होने से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया.

. नई सरकार में 1 जनवरी 2019 को हुए कैबिनेट की बैठक में नान घोटाले की जांच SIT से कराने का निर्णय लिया गया.

. 3 जनवरी को अनिल टूटेजा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रमी जमानत के लिए आवेदन पेश किया.

. 8 जनवरी को सरकार ने एसआीटी जांच का जिम्मा एसआरपी कल्लूरी को सौंपा.

. 11 जनवरी को कोर्ट ने नान मामले पर सुनवाई रोकने से इंकार कर ईओडब्ल्यू की याचिका खारिज कर दी.

. 30 जनवरी को ईडी ने नान के 16 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया.

. 1 फरवरी को ईओडबल्यू की टीम ने नान के पुराने दफ्तर में दबिश देकर 2012 से 2015 के दस्तावेज जब्त किए.

. 07 फरवरी को ईओडब्ल्यू ने मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया.

. 09 फरवरी को दोनों आईपीएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.

. 23 मई को आईएफएस कौशलेन्द्र सिंह सहित 4 लोगों को पूछताछ के लिए ईओडबल्यू ने तलब किया.

. 6 और 8 अगस्त को ईओडबल्यू ने नान के नवा रायपुर स्थित दफ्तर में दबिश देकर दस्तावेज जब्त किए.

आरोप है कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में राइस मिलरों (Rice Millers) से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई. इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम (Civil Supplies Corporation) के ट्रांसपोर्टेशन(Transportation) में भी भारी घोटाला किया गया. इस मामले में 27 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया था. जिनमें से 16 के ख़िलाफ़ 15 जून 2015 को अभियोग पत्र पेश किया गया था. जबकि मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टूटेजा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की अनुमति के लिये केन्द्र सरकार(Central Government) को चिट्ठी (Letter) लिखी गई.

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