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चंद्रयान-2 : जाने सैटेलाइट्स को क्यों लपेटा जाता है सोने की परत में

NEWSDESK
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 चंद्रयान—2 की सफल लॉन्चिंग कल हो चुकी है। इस सफलता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सफलाता माना जा रहा है। चंद्रयान—2 को ले जाने की जिम्मेदारी रॉकेट बाहुबली को दी गई थी। उसने इस सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करवा दिया है। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि चंद्रयान एक सोने की परत में लिपता हुआ प्रतित हो रहा है।

देखने के बाद सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्या किया जाता है। क्या ये सच में सोने से मढ़ा गया है या फिर सोने जैसी और कोई धातु है। वैज्ञानिकों ने इस बारे में बताया कि सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में भेजे जाने में सोने का एक अहम रोल होता है।

औद्योगिक धातु सोना किसी सैटेलाइट का अमूल्य हिस्सा होती है जिसे गोल्ड प्लेटिंग कहा जाता है। सोने की भूमिका के बारे में वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि सोना सोना सैटेलाइट की परिवर्तनशीलता, चालकता (कंडक्टिविटी) और जंग के प्रतिरोध को रोकता है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट में सोना ही नहीं अन्य मूल्यवान धातुओं का भी उपयोग किया जाता है।

जो कि सैटेलाइट को एक खास सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन धातुओं की थर्मल कंट्रोल प्रॉपर्टी सैटेलाइट में अंतरिक्ष की हानिकारक इनफ्रारेड रेडिएशन को रोकने में मदद करती है। ये रेडिएशन इतना खतरनाक होता है कि वो अंतरिक्ष में सैटेलाइट को बहुत जल्द नष्ट करने की क्षमता रखता है। चंद्रयान में ही नहीं अपोलो लूनर मॉड्यूल में भी नासा ने सैटेलाइट बनाने में सोने का इस्तेमाल किया था।

नासा के इंजीनियरों के अनुसार, गोल्ड प्लेट की एक पतली परत ( गोल्ड प्लेटिंग) का उपयोग एक थर्मल ब्लैंकेट की शीर्ष परत के रूप में किया गया था जो मॉड्यूल के निचले हिस्से को कवर कर रहा था। इन सभी तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि सैटेलाइटों को सुरक्षा प्रदान करने में सोने की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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