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आदि उत्सव जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम: राज्यपाल रमेन डेका…..

News Desk
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रायपुर: राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि आदि उत्सव का आयोजन जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। श्री डेका ने आज मध्यप्रदेश के मंडला जिले के रामनगर में आयोजित आदि उत्सव में मुख्य अतिथि की आसंदी से यह विचार व्यक्त किये।

आदि उत्सव जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम

मध्यप्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित भव्य आदि उत्सव में जनजातीय संस्कृति, इतिहास, परंपरा और गौरवशाली विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरा आयोजन गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित रहा। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि रामनगर की मिट्टी में इतिहास की महक है। यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय अस्मिता का प्रतीक है। आज मुझे इस पावन धरा में शामिल होने का अवसर मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

आदि उत्सव जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम

उन्होंने कहा कि मंडला एवं आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में जनजातीय भाई-बहन इस वृहद आयोजन में सम्मिलित होते हैं, जो इस उत्सव की लोकप्रियता और सामाजिक महत्व को दर्शाता है। आदि उत्सव ने अपनी विशिष्ट पहचान और ख्याति स्थापित की है तथा यह आयोजन जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

आदि उत्सव जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि गोंडवाना साम्राज्य का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण आज भी पूरे देश को प्रेरणा देता है। उन्होंने गोंडवाना नरेश दलपत शाह, अमर शहीद शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह के बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया।

राज्यपाल श्री डेका ने अपने संबोधन में मिलेट्स फेस्टिवल की भी सराहना करते हुए कहा कि मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में यह आयोजन नई पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से अपने जीवन में मोटे अनाज का उपयोग करता आया है। यह उनकी पारंपरिक जीवन शैली और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक रहा है। आज पूरा विश्व मिलेट्स के महत्व को समझ रहा है और इसे स्वास्थ्यवर्धक आहार के रूप में अपना रहा है।

कार्यक्रम में सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने आदि उत्सव की शुरुआत की पृष्ठभूमि से लेकर अब तक की उसकी ऐतिहासिक यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया।

आदि उत्सव जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम

कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों द्वारा मोतीमहल परिसर में स्थित शिलालेख पर जनजातीय संस्कृति की परंपरा अनुसार पूजन किया गया। सांसद श्री कुलस्ते द्वारा राज्यपाल श्री डेका एवं अन्य अतिथियों को पगड़ी एवं बीरन माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान जनजातीय लोकनृत्य, पारंपरिक संगीत, लोकगाथाओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आदि उत्सव के दौरान विभिन्न विभागों एवं जनजातीय कलाकारों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर जनजातीय संस्कृति, कला और पारंपरिक विरासत की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियाँ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके, गुजरात के जनजातीय कार्य मंत्री श्री नरेश भाई पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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