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हाईकोर्ट ने राज्य में भांग की खेती को वैध घोषित करने की मांग पर जनहित याचिका खारिज

News Desk
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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में भांग की खेती को वैध घोषित करने की मांग पर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे समाज के लिए खतरा बताते हुए स्पष्ट किया कि नीतिगत निर्णय लेना राज्य सरकार और कार्यपालिका का विशेषाधिकार है, जिसमें न्यायालय का कोई दखल नहीं हो सकता।

यह याचिका बिलासपुर के तिलक नगर निवासी डॉ. सचिन काले ने दाखिल की थी। उन्होंने याचिका में भांग को ‘गोल्डन प्लांट’ बताते हुए इसके औद्योगिक, औषधीय और आर्थिक उपयोग का हवाला दिया था। साथ ही, भांग की खेती को औद्योगिक रूप में वैध करने, राज्य स्तरीय बोर्ड गठित करने और किसानों को इसके जरिए रोजगार देने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 10 और 14 का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार को इसके लिए लाइसेंस देने का अधिकार है, लेकिन अब तक इसका उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने फरवरी 2024 में इस विषय में सरकार को पत्र भी लिखा था, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में शामिल चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने याचिका को “मूल्यहीन और पूरी तरह अनुचित” बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिकाएं केवल तभी स्वीकार की जा सकती हैं जब वे वास्तविक सार्वजनिक हित में हो, न कि किसी निजी उद्देश्य की पूर्ति के लिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि एनडीपीएस एक्ट के अनुसार भांग की खेती केवल वैज्ञानिक, चिकित्सा या बागवानी उद्देश्यों के लिए ही वैध है और उसके लिए कानूनी अनुमति अनिवार्य है। मौजूदा समय में राज्य में नशीले पदार्थों का दुरुपयोग बढ़ रहा है, ऐसे में भांग की खेती को बढ़ावा देना समाज के लिए खतरा बन सकता है।

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