Google Analytics —— Meta Pixel

मध्य प्रदेश सरकार की शराब नीति में बदलाव की योजना, अहातों को लेकर सरकार ले सकती है फैसला

News Desk
3 Min Read

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार इस बार शराब नीति में बदलाव करेगी। अब तक दुकानों के समूह बनाकर नीलामी की जाती थी, लेकिन वर्ष 2025-26 के लिए एकल दुकानों की नीलामी की जाएगी। इससे प्रतिस्पर्धा पैदा होगी और राजस्व में वृद्धि होगी। प्रदेश में 3,605 कंपोजिट शराब दुकानें हैं, जिनकी नीलामी 1,100 समूह बनाकर की गई। तय किया गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति से ही शराब की दुकानें खोली जाएंगी। धार्मिक स्थलों के पास स्थित कुछ दुकानें बंद भी की जाएंगी। 2025-26 के लिए प्रस्तावित नीति जल्द ही कैबिनेट में पेश की जा सकती है।

दुकानों के समूह बनाकर की गई प्रक्रिया

प्रदेश में देसी और विदेशी शराब की अलग-अलग दुकानों के स्थान पर कंपोजिट दुकानों की व्यवस्था लागू की गई है। वार्षिक मूल्य में 15 प्रतिशत की वृद्धि करके नवीनीकरण किया गया। चूंकि दुकानों के समूह बनाकर प्रक्रिया की गई, इसलिए अधिकांश दुकानें नवीनीकरण में चली गईं। जिनका नवीनीकरण नहीं हुआ, उन्हें वार्षिक मूल्य घटाकर दिया गया। इस बार नवीनीकरण के स्थान पर एकल दुकानों की नीलामी पर जोर दिया जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए लोगों को भी मौका मिलेगा। राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। 2003 में एकल दुकान नीलामी की व्यवस्था थी।

सरकार अहाते का विकल्प तलाश सकती है

शिवराज सरकार ने 2023 में अहाते को बंद करने का फैसला किया था। इसके पीछे तर्क यह था कि अहाते में बैठकर शराब परोसने से कानून व्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। झगड़े होते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को बंद करने के बाद लोग दुकान के आसपास शराब पीने लगे हैं, जिससे आम लोगों को भी परेशानी हो रही है। इसे देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान किया जा सकता है।

धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित दुकानें हो सकती हैं बंद

उज्जैन समेत कुछ अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शराब की दुकानें बंद हो सकती हैं। दरअसल, महाकाल लोक बनने के बाद देशभर से आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। कई बार शराब की दुकानों के आसपास कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है। इससे गलत संदेश जाता है, इसलिए कुछ दुकानें बंद की जा सकती हैं।

Share this Article