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फर्जी लोन लेकर लाखों की हेराफेरी का पर्दाफाश, सोसायटी प्रबंधक और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से किसानों फंसाया

News Desk
4 Min Read

डोंगरगढ़

भोले-भाले किसानों के नाम पर फर्जी लोन लेकर लाखों की हेराफेरी का पर्दाफाश हुआ है. सोसायटी प्रबंधक और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत ने किसानों को ऐसा फंसाया कि अब वे न खेती के लिए जरूरी साधन जुटा पा रहे हैं और न ही अपनी उपज बेचने में सक्षम हैं.

यह मामला डोंगरगढ़ विकासखंड के छिपा सहकारी समिति का है. पीड़ित किसानों का कहना है कि हमने कभी कोई लोन नहीं लिया, फिर भी हमें कर्जदार बना दिया गया. हमने सांसद, कलेक्टर, एसडीएम, सबसे शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई. अब तो ऐसा लग रहा है कि हमें आत्महत्या ही करनी पड़ेगी.

पलांदूर गांव के जितेंद्र यादव की कहानी चौंकाने वाली है. महज दो एकड़ जमीन के मालिक जितेंद्र के नाम पर 2,65,000 रुपए का कर्ज़ दिखा दिया गया, जबकि प्रावधान के अनुसार इतनी जमीन पर केवल 60,000 रुपए का लोन दिया जा सकता है, लेकिन यही कहानी अकेले जितेंद्र की नहीं है. यादव राम वर्मा, राजकुमार वर्मा, शेखर वर्मा और प्रदीप वर्मा सहित कई किसानों को इसी तरह ठगा गया. इन किसानों ने न कभी लोन के लिए आवेदन किया, न ही उन्हें इसकी जानकारी थी.

धान बेचने पर कर्ज का रकम काटने का डर
इस फर्जीवाड़े की शुरुआत तब हुई, जब सोसायटी प्रबंधक ने नवीनीकरण के नाम पर किसानों से ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए. इसके बाद बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर उनके नाम पर लोन स्वीकृत कराया और रकम हड़प ली. जब किसानों को इस धोखाधड़ी का पता चला, तब तक उनकी धान बेचने की व्यवस्था भी बाधित हो चुकी थी. किसानों का आरोप है कि बैंक और सोसायटी ने उनकी मेहनत की कमाई को तो लूटा ही, अब उन्हें मंडी में अपनी उपज बेचने तक की अनुमति नहीं मिल रही. उनकी चिंता यह है कि अगर धान बेचते हैं तो उससे मिली रकम सीधे बैंक कर्ज में काट ली जाएगी.

शिकायत की जांच कर रहे, जल्द कार्रवाई होगी : एसडीएम
डोंगरगढ़ एसडीएम मनोज मरकाम के पास अपनी फरियाद लेकर पहुंचे किसानों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फर्जी लोन माफ करने की मांग की है. एसडीएम का कहना है कि शिकायत की जांच की जा रही है. जल्द ही इस पर कार्रवाई होगी.

कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
किसान यादवराम वर्मा ने बताया, हमने कभी कोई लोन नहीं लिया, फिर भी हमें कर्जदार बना दिया गया. हमने सांसद, कलेक्टर, एसडीएम, सबसे शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई. अब तो ऐसा लग रहा है कि हमें आत्महत्या ही करनी पड़ेगी. किसान संतोष वर्मा ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, हम नौ किसान इस घोटाले के शिकार हुए हैं. जब खाद लेने गए, तब पता चला कि हमारे नाम पर लाखों का कर्ज है. हमारी मांग है कि भुगतान में बिना कोई कटौती किए हमें धान बेचने दिया जा. इस घोटाले ने किसानों की जिंदगी पर बड़ा असर डाला है। अब वे न केवल अपनी आजीविका के लिए जूझ रहे हैं, बल्कि मानसिक तनाव भी झेल रहे हैं. किसानों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे.

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