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शिवसेना (यूबीटी) का जन्म सत्ता पर कब्ज़ा करने के लिए नहीं हुआ

News Desk
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मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद महाविकास अघाड़ी में बैठकों का दौर चल रहा है वहीं चुनाव नतीजों को लेकर अघाड़ी में दरार पड़ती नजर आ रही है। कांग्रेस, उद्धव गुट की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी वाली महाविकास अघाड़ी विधानसभा चुनाव में सिर्फ 46 सीटें जीत सकी जो एक शर्मनाक हार है। इस हार के बाद अब उद्धव गुट के नेता अंबादास दानवे ने कहा है कि उनकी पार्टी का जन्म सत्ता पर कब्ज़ा करने के लिए नहीं हुआ था।दरअसल शिवसेना ठाकरे गुट के हारे हुए उम्मीदवारों के साथ-साथ जीते हुए विधायकों और पदाधिकारियों के बीच बैठक हुई। बैठक के बाद दानवे ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग महसूस कर रहा है कि पार्टी को भविष्य के चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने चाहिए। दानवे ने कहा कि पार्टी के एक बड़े वर्ग में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की भावना है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि शिवसेना (यूबीटी) सत्ता में आती है या नहीं। पार्टी सत्ता हथियाने के लिए पैदा नहीं हुई है। यह एक विचारधारा पर काम करने वाली पार्टी है। 

शिवसेना नेताओं की तरह ही कांग्रेस के लोग भी अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं
वहीं दानवे के बयान और महाराष्ट्र चुनाव पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) नेताओं की तरह ही कांग्रेस के लोग भी अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन यह पार्टी का फैसला नहीं हो सकता। हम नतीजों और हार के कारणों का विश्लेषण करने में जुटे हैं। मोदी लहर के बावजूद हमने मौजूदा नतीजों से बेहतर प्रदर्शन किया और यही वजह है कि हमें ईवीएम पर संदेह है। न्यायपालिका को इस पर ध्यान देना चाहिए।दानवे के बयान से सियासी गलियारों में चर्चा हो रही है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना आने वाले नगर निगम चुनाव में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो यह महाविकास अघाडी के लिए एक झटका होगा। 288 सदस्यों की विधानसभा में महायुति ने 233 सीटों पर जीत हासिल की है जिसमें बीजेपी की 132, शिंदे शिवसेना की 57 और एनसीपी की 41 सीटें शामिल हैं। वहीं विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाडी महज 49 सीटें हासिल की जिसमें सबसे ज्यादा उद्धव ठाकरे की शिवसेना (20 सीट) हासिल की थी। इसके अलावा कांग्रेस 16 और शरद पवार की एनसीपी 10 सीट जीत पाई। अब यह सभी अपनी हार पर मंथन कर रहे हैं। अब देखना है कि आने वाले नगर निगम चुनाव के लिए यह क्या फैसला लेते हैं।

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