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घर बैठे तनख्वाह ले रहे हैं 192 राज्यकर अधिकारी, प्रमुख सचिव अनजान

NEWSDESK
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कुछ ऐसे भी हैं जो एक साल से घर बैठे अपनी तैनाती का इंतजार कर रहे हैं। विभिन्न संवर्ग के करीब 192 ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी प्रोन्नति हो चुकी है, पर नये स्थान पर तैनाती नहीं हो पाई है। इनमें राज्यकर अधिकारी से लेकर अपर आयुक्त श्रेणी दो तक के अधिकारी शामिल हैं।

प्रदेश के खजाने में सबसे अधिक राजस्व जुटाने वाले राज्यकर विभाग में कई अधिकारी 6 से 8 माह से घर बैठे तनख्वाह उठा रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो एक साल से घर बैठे अपनी तैनाती का इंतजार कर रहे हैं। विभिन्न संवर्ग के करीब 192 ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी प्रोन्नति हो चुकी है, पर नये स्थान पर तैनाती नहीं हो पाई है। 

इनमें राज्यकर अधिकारी से लेकर अपर आयुक्त श्रेणी दो तक के अधिकारी शामिल हैं। इस साल भी अब तक इन अधिकारियों के तबादले नहीं हो पाए हैं। ऐसे में इनको तैनाती के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। दरअसल विभाग में तमाम अधिकारी ऐसे हैं जिनका राज्यकर अधिकारी (सीटीओ), सहायक आयुक्त, उप आयुक्त, संयुक्त आयुक्त और अपर आयुक्त श्रेणी-दो के पद पर पदोन्नति हुई है। इनमें से कई की तो जनवरी में ही प्रोन्नति हो गई है, लेकिन नये स्थान पर तैनाती नहीं हो पाई है। 

इनमें रूबी सिंह- प्रथम, राम प्रवेश प्रसाद, दीनानाथ, राजेश कुमार-पंचम, विजय प्रकाश राम और राम प्रकाश-तृतीय को अपर आयुक्त श्रेणी-2 के पद पर, सूर्यकांत तिवारी और विजय कुमार झा को संयुक्त आयुक्त के पद पर और आशीष शुक्ला और श्वेता तोमर को उप आयुक्त के पद पर प्रोन्नति से संबंधित आदेश 25 जनवरी को ही जारी कर दिया गया है।

इसी प्रकार दीप रतन चौधरी, योगेश कुमार विजय, अशोक कुमार बनर्जी, संजय कुमार- द्वितीय, रणकेन्द्र और अफजाल अहमद को संयुक्त आयुक्त और मनोज कुमार यादव-प्रथम, धनेंद्र कुमार पांडेय, संतोष कुमार-चतुर्थ और हरिकेश सिंह को उप आयुक्त के पद पर प्रोन्नति का आदेश 20 मई को जारी किया गया है। लेकिन इन सभी की अब तक प्रोन्नति वाले पदों पर तैनाती नहीं हो पाई है। ये कुछ नाम तो मात्र उदाहरण हैं। 

219 सीटीओ की भी तैनाती नहीं 
विभाग में समय-समय पर सीटीओ के पद पर भी 219 कर्मियों की प्रोन्नति हुई है, लेकिन उनकी अब तक ट्रेनिंग पूरी नहीं होने की वजह से तैनाती नहीं हो पाई है। इस प्रकार देखा जाए तो कुल 411 अधिकारियों को प्रोन्नति के बाद नये पद पर तैनाती भले नहीं हो पाई है, लेकिन बिना काम किए उनके खाते में हर महीने तनख्वाह व अन्य भत्ते पहुंच रहे हैं। 

संजीव मित्तल के समय से लटका है मामला
सूत्रों के मुताबिक इन अधिकारियों की प्रोन्नति वाले पदों पर तैनाती शासन स्तर से ही होती है, इसलिए राज्यकर आयुक्त की ओर से नव प्रोन्नत अधिकारियों के तैनाती का प्रस्ताव प्रोन्नति आदेश जारी होने के बाद ही शासन को भेज दिया गया था, लेकिन तत्कालीन अपर मुख्य सचिव संजीव मित्तल ने इस प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं लिया। तभी से यह फाइल शासन स्तर पर ही लटकी है।

इस तरह के किसी भी प्रस्ताव के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो मैं बात करके मामले का निस्तारण कराता हूं। 

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