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हिचकोले खाते विसर्जन के लिए जाएंगे गणेशजी

NEWSDESK
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दो दिन बाद गणपति विसर्जन होना है। दुर्ग निगम क्षेत्र में शिवनाथ नदी व ठगड़ा बांध सहित अन्य तालाबों में भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाना है। नदी व बांध में विसर्जन के लिए जाने वाले रास्ते में जगह-जगह गड्डे हैं ऐसे में गणेशजी को विसर्जन के लिए हिचकोले खाते जाना पड़ेगा।

12 सितंबर को अंनत चर्तुदशी है। इसके साथ ही भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो जाएगा। भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन पुलगांव पुल पर गुरुद्वारा के निकट शिवनाथ नदी और ठगड़ा बांध में किया जाता है। इसके अलावा दुर्ग से शीतला सतरूपा तालाब और उरला स्थित तालाब में भी प्रतिमा विसर्जन किया जाना है। शिवनाथ नदी स्थित गुरुद्वारा रोड में बड़े-बड़े गड्डे हैं। वहीं नदी जाने वाले गंजपारा मार्ग में भी गंजपारा चौक और पुष्पवाटिका के निकट बड़ा गड्ढा नजर आ रहा है। विसर्जन से पहले प्रशासन द्वारा इन गड्डों को भरने का काम नहीं किया गया है इस कारण भगवान गणेश को हिचकोले खाते हुए विसर्जन के लिए जाना पड़ेगा।

एनजीटी के निर्देशों का करना है पालन

विसर्जन से नदी व तालाबों के पानी को प्रदूषित होने बचाने दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इसका पालन निकायों को करना है। इसके लिए निगम प्रशासन द्वारा चि-ति तालाबों में ही प्रतिमा विसर्जन किया जाना है, जहां निगम प्रशासन द्वारा पूजा सामग्रियों को रखने अलग से व्यवस्था बनाई जानी है। ऐसे स्थानों पर अलग विसर्जन कुंड बनाया जाना है। सुरक्षा के लिहाज से विसर्जन स्थल पर बिजली व गोताखोरों की तैनाती भी की जानी है। बड़े प्रतिमाओं का विसर्जन के लिए जेसीबी की भी व्यवस्था करनी होगी।

विसर्जन की तैयारी शुरू

गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। विसर्जन स्थल पर बिजली सहित अन्य व्यवस्था करने कहा गया है। साथ ही सुरक्षा का भी ध्यान रखने निर्देशित किया गया है।

दिनेश देवांगन, प्रभारी लोक निर्माण विभाग ननि दुर्ग

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