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रायपुर : विशेष लेख : सफल उद्यमी बनने का सपना साकार कर रही है रीपा योजना

NEWSDESK
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अब खरीफ के अलावा रबी की फसल का भी ले रहे हैं लाभ

रायपुर, 27 अगस्त 2023

राज्य शासन की कृषि योजनाओं से किसानों का खेती के प्रति रूझान बढ़ा है। शासन द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है जिनमें से शैलो ट्यूबवेल योजना महत्वपूर्ण है। इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।  लघु और सीमांत किसानों के लिए खेती-किसानी हमेशा से चुनौती पूर्ण रही है। राज्य में कई किसान सिंचाई की कमी की वजह से उन्नत कृषि नहीं कर पाते। इसके अलावा रबी और खरीफ की फसल भी नहीं ले पाते। पूरी तरह मानसून पर आधारित खेती में किसान हमेशा चिंतिंत रहता है। ऐसे किसानों के लिए शैलो ट्यूबवेल योजना काफी लाभप्रद साबित हो रहे हैं।

योजना का लाभ लेते हुए महासमुंद विकासखण्ड के ग्राम चिंगरौद के ऐसे ही लघु सीमांत कृषक श्री तेजकुमार साहू ने खेती को घाटे से उबारते हुए कृषि को लाभदायक बनाया है। वे बताते है कि पूर्व में सिंचाई के साधन नहीं होने से खरीफ में ही खेती का कार्य करते थे, सिंचाई पूरी तरह मानसून पर निर्भर होने के कारण उत्पादन कम होता था। जिससे फसल उत्पादन की मात्रा उम्मीद से कम होता था। लागत की तुलना में आय कम प्राप्त होती थी। इस कारण घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी।

कृषक श्री साहू ने कृषि विभाग द्वारा संचालित राजिम भक्तिन धारा योजना अंतर्गत शैलो ट्यूबवेल का लाभ उठाकर अपने खेत में ट्यूबवेल खुदवाया। जिससे अब वे रबी और खरीफ दोनों फसल लेते हैं। अब खेती का रकबा सिंचित होने से फसल का नुकसान नहीं होता है। कृषक अब वर्षा के ऊपर निर्भर नहीं है। कृषक के द्वारा खरीफ में धान फसल तथा रबी में दलहन, तिलहन व अन्य फसल का उत्पादन करता है। जिससे कृषक की आय में वृद्धि हुई। इस तरह कृषक वर्ष में खरीफ एवं रबी फसल लेकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार किया। विभाग की राजिम भक्तिन धारा योजना अंतर्गत शैलो ट्यूबवेल खनन से कृषक का जीवन स्तर एवं आर्थिक स्तर में सुधार हुआ।

किसानों को मिलता है शत प्रतिशत अनुदान
महासमुंद जिले में लगभग 400 शैलो बोर का खनन किया गया हैं। यह कम गहराई वाला या उथला ट्यूबवेल है , जिसकी अधिकतम गहराई 50 फ़ीट होती है। खासकर नदी किनारे बसे गावों के लिए बेहद उपयोगी है। एक शैलो ट्यूबवेल की लागत लगभग 20 हजार रुपये है और शासन इसके लिए किसानों को  शत प्रतिशत  अनुदान  देती है । शासन द्वारा इसमे 5 हजार रुपये खुदाई के लिए और 15 हजार पम्प प्रतिस्थापन के लिए किसानो को प्रदान किया जाता है ।

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