Google Analytics —— Meta Pixel

यह देशी आवारा कुत्ता बना पुलिस की शान, जाने कैसे…

NEWSDESK
3 Min Read

जयपुर- हमारे आसपास न जाने कितने अवारे कुत्ते घूमते हैं। कोई उन पर रहम करते हुए खाना खिला देता है तो वहीं कोई उनसे डरकर पत्थर और डंडों की उनपर बरसात कर देता है। कई लोग तो इन बेजुबानों की शिकायत नगरपालिका से करते हैं, तो कर्मचारी उन्हें पकड़कर ले जाते हैं।

और शेल्टर होम में डाल देते हैं। लेकिन गलियों में घूमने वाला आवारा डॉगी, आज पुलिस के श्वान दल की शान बना हुआ है। और इसका देश में पहला प्रयोग उत्तराखंड पुलिस ने किया है। आइए जानते हैं इस कुत्ते के बारे में-

सड़कों पर घूमने वाले इस आवारा कुत्ते को जब उत्तराखंड पुलिस ने ट्रेनिंग दी तो यह नामी नस्लों के लाखों रुपये के दाम वाले डॉगी से कहीं आगे निकला। अब यह डॉगी उत्तराखंड पुलिस का सबसे फुर्तीला स्निफर डॉग है। उत्तराखंड पुलिस ने इसकी सूंघने की खूबी को अपनी ताकत बनाया और अपनी डॉग स्क्वाड का हिस्सा बना लिया। इस स्निफर डॉग का नाम ‘ठेंगा’ रखा गया है।

देश में पहली बार उत्तराखंड पुलिस ने गली के स्ट्रीट डॉग को श्वान दल में शामिल करने का प्रयोग किया है। ‘ठेंगा’ नामक यह देसी कुत्ता पुलिस में भर्ती होने वाले विलायती कुत्तों के परंपरागत नार्म्स को तोड़ दिया है। अब तक बेल्जियम, जर्मन शैफर्ड, लैबरा, गोल्डन रिटीवर आदि विदेशी नस्ल के कुत्तों को ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के श्वान दल का हिस्सा होते थे।

विलायती कुत्तों को खरीदने में ही प्रति कुत्ते 30 से लेकर 70 हजार रुपये में खर्च आता है। इसके अलावा उनकी ट्रेनिंग भी काफी खर्चीली होती है। अमूमन आम घरों में भी गली के बजाय विदेशी नस्ल के कुत्तों को ही ड्राइंग रूम का हिस्सा बनाया जाता है।

आमतौर पर सभी स्निफर डॉग की ट्रेनिंग आईटीबीपी ट्रेनिंग सेंटर में होती है। लेकिन ठेंगा की ट्रेनिंग देहरादून में ही हुई है। नौ नवंबर को पुलिस लाइन में हुई स्थापना दिवस परेड में ठेंगा अपने काबलियत प्रदर्शित कर चुका है।

आग के गोलों से निकलने के साथ अल्प प्रशिक्षण में साक्ष्य को सूंघकर अपराधियों तक पहुंचने के कौशल को देखकर श्वान विशेषज्ञ भी दंग है। परेड के दौरान ठेंगा ने अपराधी के छूटे हुए साक्ष्य को सूंघकर अपनी विशेष क्षमता के बल पर छुपे अपराधी को खोज निकाला।

Share this Article