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पिता के कातिलों की पहचान 10 साल के बच्चे ने की थी , हाईकोर्ट ने खारिज की दोषियों की अपील…

NEWSDESK
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आरोपियों (Convicts) ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट (High Court) में अपील (Appeal) की थी. हाईकोर्ट के डिवीजन बैंच ( Division bench) ने आरोपियों की अपील खारिज (Dismiss) कर सजा (Punishment) बरकरार रखी है.

10 साल का बच्चा (Kid) अपने पिता महेश्वर के साथ स्कूल से घर जा रहा होता है. स्कूल (School) से कुछ ही दूर पर कुछ बदमाश उनका रास्ता रोक लेते है और बच्चे के पिता से एक खत पढ़ने को कहते है. महेश्वर बदमाशों की बात नहीं मानते और उन्हे जाने को कहते हैं. अचानक बदमाश महेश्वर से सिर पर पिस्टल अड़ा देते है और ‘यू आर अंडर अरेस्ट’ बोलकर फायर कर देते है. गोली लगने से महेश्वर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो जाती है. ये पूरी घटना महेश्वर के 10 से बेटे के सामने होती है. मामला जब पुलिस तब पहुंचा तो बच्चे से आरोपी की शिनाख्त कराई गई. मासूम ने अपने पिता का हत्यारों को पहचान लिया. बच्चे की गवाही पर कोर्ट ने सभी आरोपी को सजा भी सुनाई. आरोपियों (Convicts) ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट (High Court) में अपील (Appeal) की थी. हाईकोर्ट के डिवीजन बैंच ( Division bench) ने आरोपियों की अपील खारिज (Dismiss) कर सजा (Punishment) बरकरार रखी है.

10 साल के बच्चे ने पहचाना था अपने पिता के कातिलों को:

दरअसल, के पास एक गांव में रहने वाला 10 वर्षीय कमलनाथ सिंह अंबिकापुर के एक निजी स्कूल में पढ़ता था. वो बस से स्कूल तक आना-जाना करते था. मुख्य सड़क पर एक बस स्टॉप से उसके पिता उसे लाना- छोड़ना किया करते थे. 5 जुलाई 2008 की दोपहर करीब 3.40 बजे वो स्कूल की छुट्‌टी होने के बाद छिरगा मोड़ के पास पिता महेश्वर सिंह का इंतजार कर रहा था. उसके पिता आए तो वे दोनों बाइक से गांव के लिए निकले.

कुछ दूर जाने के बाद नाले के पास पहुंचे ही थे कि उन्हें पप्पू उर्फ विवेक उर्फ लोहा सिंह उर्फ आजाद उर्फ अमरनाथ ने रोका. रुकने पर एक पत्र पढ़ने के लिए दिया. मना करने पर महेश्वर के सिर पर गन अड़ा दी और ‘यू आर अंडर अरेस्ट’ बोलकर फायर कर दिया. महेश्वर की मौके पर ही मौत हो गई, इसके बाद वे बाइक लेकर फरार हो गए. पास ही रहने वाले देवकुमार ने भी गोली चलने की आवाज सुनी थी.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, यहां से पत्र जब्त करने के साथ शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा. 10 साल के बच्चे ने शिनाख्त परेड के दौरान दोनों आरोपियों को पहचाना था. ट्रायल कोर्ट ने बच्चे की गवाही के आधार पर मामले में आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्र कैद, 394/34 के तहत 10 वर्ष और पप्पू उर्फ विवेक को आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई थी. आरोपियों पप्पू उर्फ विवेक और अरविंद कुमार तिग्गा ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी. मामले पर सुनवाई के बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस रजनी दुबे की बेंच ने अपील यह कहते हुए खारिज कर दी है कि बच्चा तथ्यों के संबंध में सबूूत देने के लिए सक्षम और विश्वसनीय पाया जाता है. तो ऐसा एकमात्र सबूत दोषसिद्धि का आधार हो सकता है.

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