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त्रेतायुग में राम, हनुमान, बाली नहीं बल्कि ये राक्षस था सबसे शक्तिशाली, नाम जानकर चौक जायेंगे आप

NEWSDESK
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रामायण हिन्दू रघुवंश के राजा राम की गाथा है। । यह आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य, स्मृति का वह अंग है। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ भी कहा जाता है। रामायण के सात अध्याय हैं जो काण्ड के नाम से जाने जाते हैं, इसके 24,000 श्लोक हैं।

बाली और राम जी

बाली को शक्तिशाली इसलिए भी कहा जाता था क्योंकि उसके सामने जो भी योद्धा लड़ता उसके आधी शक्ति बाली में अपने आप आ जाती थी। इसलिए भगवान राम को छुपकर पीछे से उसे मारना पड़ा। मगर युद्ध के दौरान हनुमान जी से वह हार जाते हैं तो बाली जी को यहां शक्तिशाली नहीं बोल सकते।

भगवान ने जब राम के रूप में बता लिया तो मैं मर्यादाओं में सीमित रहती हैं वह अपनी सारी शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते हैं भगवान के नियम के भी खिलाफ होता है। आप समझ गए होंगे मैं राम जी को क्यों नहीं शक्तिशाली बता रहा हूं।

मेघनाथ

रावण जितना शक्तिशाली था उतना ही ज्ञानी भी था और उसने अपने ज्ञान से ग्रहों की ऐसी स्थिति में लाया जिससे वह एक शक्तिशाली पुत्र प्राप्त कर सके। उसके पुत्र की रोने की आवाज बिजली के खड़कने जैसी थी तो इसलिए उसका नाम मेघनाथ रखा। राक्षस और देवताओं के युद्ध के दौरान मेघनाथ ने अकेले ही इंद्र को हरा दिया था और बंदी बना लिया था। इंद्र को छुड़ाने के लिए ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दिया कि उसे युद्ध में कोई नहीं हरा सकता मगर युद्ध करने से पहले उसे एक यज्ञ करना होगा।

मेघनाथ ने अपनी क्षमता से बिना यज्ञ के ही राम जी और लक्ष्मण जी को दो-दो बार हराया था। वह अकेला ही वानर सेना पर भारी पड़ता था। लक्ष्मण जी भी एक शक्तिशाली योद्धा थे मगर मेघनाथ ने उन्हें नागपाश अस्त्र से बेहोश कर दिया था। लक्ष्मण और मेघनाथ का युद्ध महायुद्ध कहा जाता है उस युद्ध के साक्षी पूरी वानर सेना और राक्षस सेना थी

अगले दिन लक्ष्मण जी को दोबारा युद्ध भूमि में देखकर वह हक्का-बक्का रह गया और समझ गया कि भगवान राम और लक्ष्मण कोई आम इंसान नहीं है इसलिए उसने अपने पिता को से आग्रह किया कि सीता जी को लौटा दे फिर भी पिता का आदेश मानकर वह एक ढाल बनकर राम जी के सामने खड़ा रहा और पिता के लिए मृत्यु को गले लगा लिया।

इंद्रजीत दुनिया का इकलौता योद्धा था जिसके पास तीनों अस्त्र थे। उसके पास पशुपतास्त्र, ब्रह्मास्त्र और नारायणास्त्र था। उसके युद्ध की कला को कोई नहीं जान सकता था युद्ध कला में वह बहुत अद्भुत था। अगर उसका यज्ञ सफल हो जाता या तीनों अस्त्रों में से किसी का प्रयोग कर देता तो आज इतिहास कुछ और होता।

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