Google Analytics —— Meta Pixel

जानिए इस संयोग में राखी बांधना क्यों होता है अशुभ, भद्राकाल में राखी बांधने से रावण का हुआ था सर्वनाश

NEWSDESK
2 Min Read

सावन के महीने में मनाया जाने वाला रक्षाबंधन का पर्व इस बार 15 अगस्त को मनया जाएगा। इस दिन बहने अपने भाईयों की कलाई में राखी बांधती हैं। वहीं, सभी बहनों को हर साल सावन मास की पूर्णिमा का इंतजार रहता हैं। बता दें इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इसके आलवा भी रक्षाबंधन पर कई शुभ संयोग बनेगा।

इस बार रक्षाबंधन के दिन श्रावण नक्षत्र, सौभाग्य योग, सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। इसके अतिरिक्त रक्षाबंधन के चार दिन पहले गुरु मार्गी होंगे यानी सीधी चाल चलेंगे। साथ ही इस बार रक्षाबंधन गुरुवार के दिन पड़ने से बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है।

हिंदू मान्यता के मुताबिक, जब भी भद्रा का समय होता है तो उस दौरान राखी नहीं बांधी जा सकती है। भद्राकाल के समय राखी बांधना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। जिस तरह से शनि का स्वभाव क्रूर और क्रोधी हैं। उसी तरह से भद्रा का भी है।

वहीं, भद्रा के उग्र स्वभाव के कारण ब्रह्माजी ने इन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया है। पंचाग में इनका नाम विष्टी करण रखा गया है। दिन विशेष पर भद्रा करण लगने से शुभ कार्यों को करना निषेध माना जाता है। एक अन्य मान्यता के मुताबिक रावण की बहन ने भद्राकाल में ही अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधा था। जिसके कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था।

Share this Article