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जवाहर लाल नेहरू ने भी परिवार संग INS दिल्ली युद्धपोत में फरमाया था आराम

NEWSDESK
5 Min Read

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का भी दिली नाता रहा है INS दिल्ली से, पढ़िए ऐतिहासिक युद्धपोत की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की. इस दौरान उन्होंने अपने अंदाज में विरोधियों को घेरा. लेकिन इस बार पीएम मोदी की जुबान पर जिक्र आया युद्धपोत आईएनएस विराट का. पीएम मोदी गांधी परिवार पर आरोप लगाया कि ये परिवार छुट्टी मनाने के लिए युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया था. गांधी परिवार का ये पहला मामला नहीं था, इससे पहले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी सपरिवार युद्धपोत में आराम का वक्त बिताते नजर आए थे.

ये बात है जून, 1950 की. इसी साल देश का संविधान लागू किया गया था. एक जानकारी के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान उनके पोते राजीव गांधी और संजय गांधी ने आईएनएस दिल्ली में नौसेना अभ्यास में भाग लिया था. काफी तस्वीरों को खंगालने के बाद एक और तस्वीर हाथ लगती है. इस तस्वीर में पंडित जवाहरलाल नेहरू, प्रधानमंत्री, अपनी बेटी इंदिरा के साथ आराम करते हुए नजर आते है.

दूसरी तस्वीर
एक और तस्वीर में पीएम नेहरू के साथ उनके दो पोते संजय गांधी और राजीव गांधी दिखते हैं. बताया जाता है कि ये दृश्य जून 1950 का ही है. ये तस्वीर पीएम नेहरू के इंडोनेशिया यात्रा के दौरान की है. यात्रा के दौरान, आईएनएस दिल्ली के डेक पर राजीव और संजय गांधी दिख रहे हैं और बाकी नेवी के अधिकारी उनके आस-पास मौजूद हैं.

आईएनएस दिल्ली (1948-1978)
INS दिल्ली 1933 में रॉयल नेवी के लिए HMS Achilles ( द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ये लिएंडर क्लास लाइट क्रुजर न्यूजीलैंड नेवी में सेवारत थी) के रूप में बनाया गया. ये एक लिएंडर-क्लास लाइट क्रूज़र था. रॉयल नेवी के न्यूजीलैंड डिवीजन (1941 से रॉयल न्यूजीलैंड) से कमीशन में प्राप्त किया गया. 1937 में HMNZS Achilles के रूप में नौसेना के बेड़े में शामिल हुई थी. द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में उसे रॉयल नेवी में लौटा दिया गया और 1948 में रॉयल इंडियन नेवी को बेच दिया गया.

1950 में बदला गया था नाम
1950 में उसका नाम बदलकर INS दिल्ली कर दिया गया और 30 जून 1978 को बंबई में डिकॉय करने के बाद तक वह सेवा में रहा. इस जहाज को रॉयल इंडियन नेवी में HMIS दिल्ली के रूप में 5 जुलाई 1948 को रॉयल नेवी के कैप्टन एच एन ब्राउन के नेतृत्व में लाया गया था. उसके पास 17 ब्रिटिश अधिकारी थे बाकी चालक दल भारतीय थे. कमांडर राम दास कटरी उनके कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठतम भारतीय अधिकारी थे, जबकि लेफ्टिनेंट सरदारलाल मथुरादास नंदा उनके पहले लेफ्टिनेंट थे. HMIS दिल्ली 16 सितंबर 1948 को बॉम्बे पहुंचा.

आधार कुमार चटर्जी पहले कमांडिंग ऑफिसर
जनवरी 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद, उन्हें आईएनएस दिल्ली का नाम दिया गया. जून 1950 में, कमांडर आधार कुमार चटर्जी (बाद में नौसेनाध्यक्ष) आईएनएस दिल्ली के पहले भारतीय कमांडिंग अधिकारी बने थे. उसी महीने ही पीएम जवाहरलाल नेहरु को इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा पर भेजा गया था.

जेबी सीमन्स पहले लेफ्टिनेंट
1951 में पहले लेफ्टिनेंट जेबी सीमन्स थे. उन्होंने स्वतंत्रता के बाद पहली बार झंडा दिखाते हुए अफ्रीका और मेडागास्कर की ओर रवाना किया था. 1953 में उन्होंने क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के राज्याभिषेक का जश्न मनाने के लिए फ्लीट रिव्यू में भी भाग लिया था.

ऑपरेशन विजय में भी आईएनएस दिल्ली का योगदान
18 दिसंबर 1961 को, भारत के “ऑपरेशन विजय” या पुर्तगाली-भारतीय युद्ध में भी इसकी भूमिका थी. सुबह के समय, जहाज को पुर्तगाली रक्षकों ने देख लिया था लेकिन इसके लहराए गए लड़ाई झंडे को नहीं पहचान पाए. उसके बाद भारतीय थल सेना और वायु सेना तीनों ने मिलकर यहां हमला बोल दिया. भारतीय सैनिकों की टुकड़ी ने गोवा के बॉर्डर में प्रवेश किया. 36 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक जमीनी, समुद्री और हवाई हमले हुए. इसके बाद पुर्तगाली सेना ने बिना किसी शर्त के भारतीय सेना के समक्ष 19 दिसंबर को आत्मसमर्पण किया.

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