रविवार सुबह, चार राज्यों में चुनावी नतीजों के दिन, दिल्ली में कांग्रेस दफ़्तर के बाहर कुछ उत्साही कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के इंतज़ाम के साथ हैं. राम और हनुमान के स्वरूप में कलाकार भी हैं.
दफ़्तर की बाहरी दीवार पर बड़े-बड़े बैनर हैं, जिनमें भगवान राम और उनके चरणों में बैठे हनुमान की तस्वीर है.
नीचे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य कांग्रेसी नेता हैं.
जैसे-जैसे टीवी स्क्रीन पर चुनावी रुझान आगे बढ़ते हैं, कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भीड़ छँटने लगती है. दस बजे तक राजस्थान और मध्य प्रदेश में बीजेपी की बढ़त स्पष्ट हो जाती है, लेकिन रुझानों में छत्तीसगढ़ में कांटे की टक्कर दिखती है.
लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता और मूल रूप से बिहार के रहने वाले पांडे (वो अपना सिर्फ़ उपनाम ही बताते हैं), उदास और नाराज़ हैं.
सख़्त लहज़े में वो कहते हैं, “हमारी पार्टी का नेतृत्व देश का मिजाज़ नहीं समझ पा रहा है. राहुल गांधी मेहनत तो बहुत कर रहे हैं, लेकिन जनता तक उनका संदेश नहीं पहुँच रहा है. संगठन की कमियों को दूर नहीं किया जा रहा है.”
पांडे अपनी बात पूरी कर ही रहे थे कि एक अन्य समर्पित कार्यकर्ता अपना आक्रोश ज़ाहिर करते हुए कहता है, “राजस्थान, मध्य प्रदेश का समझ आता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ये हार पचा पाना आसान नहीं है. कहीं तो कोई बहुत बड़ी कमी है, जिसे सुधारा नहीं जा रहा है.”
छत्तीसगढ़ के निवर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नतीजों की पूर्व संध्या तक दावा किया था कि वो बहुमत से वापसी कर रहे हैं.
अधिकतर एग्ज़िट पोल और चुनावी सर्वे में भी उन्हें बढ़त दिखाई दिखाई गई थी. कुछ एग्ज़िट पोल में कांटे की टक्कर का दावा किया गया था. लेकिन अंतिम नतीजे आते-आते कांग्रेस 36 सीटों पर सिमट गई और बीजेपी के खाते में 54 सीटें चली गईं.
कांग्रेस प्रवक्ता अलका लांबा इस हार पर कहती हैं, “हमारे लिए सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ है. हम मान कर चल रहे थे कि छत्तीसगढ़ में कोई सरकार विरोधी लहर नहीं है और हमारे पाँच साल के काम पर बहुमत मिलता दिख रहा था. वहां हार क्यों हुई, इस पर मंथन करने की ज़रूरत है. पार्टी नेतृत्व इसकी गहनता से समीक्षा करेगा.”
कांग्रेस के कई और कार्यकर्ता इसी तरह की बात करते हुए कहते हैं, “छत्तीसगढ़ की हार अप्रत्याशित है, समझ नहीं आ रहा है कि हम क्यों हारे.”
हालांकि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि छत्तीसगढ़ में हार की एक बड़ी वजह भूपेश बघेल का आत्मविश्वास और अपनी हक़ीक़त से बड़ी छवि पेश करना भी है.
इसके अलावा विश्लेषक मानते हैं कि हिंदुत्व के मुद्दों की काट कांग्रेस नहीं ला सकी. मोदी के चेहरे का मुक़बाला कांग्रेस नहीं कर सकी.

