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छत्तीसगढ़ में कम बारिश से चिंता में किसान, अब बोरवेल के भरोसे खेती…

NEWSDESK
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छत्तीसगढ़ का अन्नदाता फसल की पैदावार को लेकर चिंतित है, क्योंकि बरसात की आस अधूरी रह गई है। ऐसे में महामाया के बजाय सरना, एचमटी धान की लागत निकल नहीं पाएगी। अभनपुर महुदा गांव के किसान रुक्मणी साहू ने कहा कि आषाढ़ के बाद सावन का महीना भी सूखा में बीत गया, लेकिन जिले में अब तक अच्छी बारिश नहीं हुई है। फसलों को पानी नहीं मिलने से वे सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। वहीं कुछ लोगों के पास बोरवेल की सुविधा है। उसी के भरोसे खेती तैयार कर रहे हैं। बाकी किसानों की खेती भगवान भरोसे है यानी धान को कुल पानी का अभी तक 25 फीसद ही पानी मिल पाया है।

किसानों का बियासी कार्य रुका

जिले की संभावित औसत वर्षा 705 मिमी है, लेकिन अभी तक जिले में 503.6 मिमी ही बारिश हुई है। आषाड़ का महीना सूखा बीतने के बाद अब किसानों को तीजा नवरात्रि तक बरसात की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आसमान पर बादल तो छाते हैं, लेकिन बारिश नहीं होती है। किसानों ने शुरू में हुई अच्छी बरसात से बोनी कार्य तो पूरा कर लिया। वहीं अभी कई हिस्सों में रोपाई भी हो गई, लेकिन कई किसानों का बियासी का कार्य भी बरसात के कारण रुका हुआ है।

प्रदेश में सामान्य हुई बरसात

प्रदेश में बस्तर के छह जिलों में अधिक बरसात हुई है, जहां पर वाटर मैनेजमेंट के तहत पानी को जमा करना चाहिए। इसके अलावा सरगुजा, राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, भाटापारा, मुंगेली, रायपुर जिले के कुछ ब्लॉक में कम बरसात हुई है। हालांकि अभी भादों की बरसात शेष है, जिससे किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि धान की फसल को लगभग 900 से 12 मिमी पानी की आवश्यकता होती है, जिसमें 500 मिमी तक मिल चुका है।

बांध में पानी हुआ कम

किसानों के लिए पानी की दिक्कत लगभग आठ जिलों में है। इसी तरह से प्रदेश के लगभग 44 छोटे-बड़े डैम, तालाब में पानी उनकी कुल समक्षता के अनुरूप 68 फीसद भरा हुआ है, जो कि पिछले वर्ष भी 15 अगस्त तक यह संख्या 56 फीसद रहा था, इसलिए डैम के आसपास के किसानों को राहत हैं। बाकी ब्लॉकों में सूखा है।

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

इंदिरा गांधी कृषि विवि में मौसम वैज्ञानिक व विभागाध्यक्ष डॉ. जीके दास का कहना है कि किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसान खेत की नमी को देखते हुए एक बार में युरिया का छिड़काव नहीं करे, बल्कि दो से तीन बार का छिड़काव फसल में किया जाए। इससे धान की फसल प्रभावित नहीं होगी। वहीं कृषि विभाग भी जिलेवार के बदले सुख रहे ब्लाकों के कृषकों को जागरूक करना चाहिए। वहीं आने वाले दिनों में बारिश के अच्छे संकेत है, इसलिए किसान परेशान नहीं हो।

किसानों से बातचीत

बारिश नहीं होने से खेत की नमी गायब कम हो गई है। कुछ दिन पहले हुई बरसात से सड़कों का पानी खेत में आया है। इसी के भरोसे फसल है। – रुक्मणी साहू

तीजा तक अच्छी बरसात होने की उम्मीद में बैठे है, अन्यथा फसल की कुल लागत भी निकलना मुश्किल है। – अलंग राम साहू

उंचान होने के कारण खेत में पानी रुकता नहीं है, जिससे देरी से रोपाई किया, अब फसल के लिए पानी है। – नंदकुमार पटेल

बोरवेल के माध्यम से धान की सिंचाई कर रहे है, लेकिन आगे चलकर स्थिति दिक्क्त हो जाएगी।

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