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छत्तीसगढ़ – करतारपुर जाने प्रदेश के श्रद्धालुओं का रेल किराया वहन करेगी सरकार : सीएम भूपेश

NEWSDESK
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प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोहन नगर स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेका और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के संबोधन के साथ उन्होंने कहा कि जिस पूज्य भूमि में पूज्य गुरुनानक देव जी ने इतने बरस गुजारे, उस पवित्र करतारपुर साहिब जाने का मार्ग श्रद्धालुओं के खोल दिया गया है।

प्रदेश के श्रद्धालु भी पवित्र करतारपुर साहिब जा कर पुण्य लाभ उठाना चाहेंगे। प्रदेश सरकार उनके रेल यात्रा खर्च वहन करेगी। प्रकाशपर्व के इस पावन अवसर पर आप लोगों के बीच आकर अभिभूत हूं। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधकों ने मुख्यमंत्री को सरोपा भेंट किया। इस दौरान सेवादार अरविंदर खुराना समेत गुरुद्वारा के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

गुरुनानक देव ने ऊंच-नीच का भेद मिटाया: भूपेश

 श्री गुरुनानक देव जी महाराज के 550वें प्रकाश उत्सव के पांच दिवसीय आयोजन के पांचवें दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे। गुरुनानक स्कूल परिसर में कहा कि गुरुनानक देव जी महाराज का अवतरण ऐसे समय में हुआ, जब समाज में कुरीतियां व्याप्त थीं। बुराईयां, पाखंड और अंधविश्वास था। वे बाल्यकाल से ही चिंतन, मनन करने वाले रहे और मानवता के प्रति श्रद्धा उनके मन में रही है। उन्होंने दीन दुखियों को भोजन कराया और तभी से सिख समाज लंगर का आयोजन करता आ रहा है।

गुरुनानक देव जी ने अज्ञानता के खिलाफ संदेश दिया। गुरुनानक देव जी एक मात्र ऐसे संत थे, जिन्होंने सबसे लंबी पदयात्रा कर मानवता, समानता, भाईचारा और प्रेम का संदेश दिया। हम सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं। हमें आपसी भाईचारे के साथ रहना चाहिए। श्री गुरुनानक देव जी ने ऊंच-नीच, छुआछूत और जातिवाद से ऊपर उठकर मानवता का संदेश दिया है। उसे अमल में लाना चाहिए। समाज की समृद्धि, शांति के बिना संभव नहीं है। सभी संकल्प लें कि गुरुनानक देव जी के बताए रास्ते पर चलेंगे। 

उन्होंने सिख समाज को प्रकाश पर्व की बधाई देते हुए यह भी बताया कि करतारपुर की यात्रा के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से व्यवस्था की गई है। समाज के लोग इस यात्रा में जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने लंगर भी परोसा और सभी के साथ बैठकर लंगर भी छका। इधर, सुबह 8 बजे से दीवान सजा। पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थे भाई मेहताब सिंह, भाई सरबजीत सिंह पटना वाले, भाई सतपाल सिंह दिल्ली वाले ने कीर्तन से साध संगत को निहाल किया। हेड ग्रंथी मान सिंह बड़ला ने सरबत के भले के लिए अरदास की। समूह साध संगत के लिए लंगर की व्यवस्था थी।

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